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माँगि आ कोखि

April 17, 2016 Editor 0

– रामदेव शुक्ल ‘अकाट गरीबी में जाँगर फटकत जनम बिता देबू कि तनिएसा मन बदलि के अमीर हो जइबू? सोचि समुझि ल, अपने मालिक से […]

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कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

July 4, 2015 Editor 1

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके […]

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लाल निशान

June 9, 2015 Editor 0

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से […]

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प्रेम के सुभाव

April 30, 2015 Editor 0

– रामदेव शुक्ल मीतू हम दूनू जने उहाँ पहुंचि गइल बानी जाँ, जहाँ से लवटले के कवनो राहि नइखे बँचल। अगहीं बढ़े के बा, चाहे […]

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केकरा पर करबि सिंगार

April 15, 2015 Editor 0

– रामवृक्ष राय ‘विधुर’ जवार भर में केहू के मजाल ना रहे कि भोला पहलवान का सोझा खड़ा होखे. जब ऊ कवनो बाति पर खिसिया […]

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वरमाला

April 4, 2015 Editor 0

– कामता प्रसाद ओझा ‘दिव्य’ अन्हरिया….. घोर अन्हरिया…. भादो के अन्हरिया राति. छपनो कोटि बरखा जइसे सरग में छेद हो गइल होखे. कबहीं कबहीं कड़कड़ा […]

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बाजलि बैरनि रे बाँसुरिया

April 2, 2015 Editor 0

– गिरिजाशंकर राय ‘गिरिजेश’ पाकिस्तान के मारि के हमार सिपाही ओकर छक्का छोड़ा दिहलन सऽ. चीन क कुल्हि चल्हाँकी भुला गइल. मिठाई खाइब… हो… हो. […]

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भैरवी क साज

April 1, 2015 Editor 0

– ईश्वरचन्द्र सिन्हा सिंहवाहिनी देवी के सालाना सिंगार के समय माई के दरबार में जब चम्पा बाई अलाप लेके भैरवी सुरू कइलिन, त उहाँ बइठल […]

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भगवान के चटकन

March 23, 2015 Editor 2

– डॉ॰ उमेशजी ओझा अरे ए रबिन्दरा, आपन दिमाग ठीक राख, जमीन प रहेके सीख, हवा में मत उड़. सब कोर्इ के इजत होला. जोऽ, […]

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गुलजारी लाल के जूता

January 25, 2015 Editor 1

– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर […]

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वीर विशाल

November 20, 2014 Editor 0

– डॉ॰ उमेशजी ओझा एगो छोटहन गांव में दीपक अपना धर्मपत्नी सुरभी आ एगो 14 बरीस के बेटा विशाल के साथे रहत रहले. दीपक के […]

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कुलछनी

October 26, 2014 Editor 2

– डॉ॰ उमेशजी ओझा नीलम के गोड़ धरती प ना पड़त रहे. खुशी के मारे एने से ओने उछलत कुदत चलत रही. एह घरी के […]

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कांच कोइन

July 8, 2014 Editor 1

– संतोष कुमार ‘इहाँ हमरा से बड़का हीरो कवनो बा का ? हम अभिए चाहीं त निमन निमन जाने के ठीक कर दीं’ – किसुन […]

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सखी

July 3, 2014 Editor 1

– डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना लोर से भरल आँख अउरी मुँह पर पसरल उदासी साफ साफ झलका देला कि कवनो परानी दुख में केतना गोताइल […]

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भूत होला का ?

April 5, 2014 Editor 2

– ‍नीमन सिंह बात १९८० के बरसात के समय के ह. हमरा खेत में धान रोपे खातिर बेड़ार में बिया उखाड़े लागल मजदूर बिया उखाड़त […]

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प्रेम के लहर

May 27, 2013 Editor 2

– केशव मोहन पाण्डेय जमाना बदलऽता, एकर लछन शहर से दूर गाँवो-देहात में लउकऽता. अब ठेंपों छाप लोग के बात-व्यवहार में जमाना के नवका रूप […]

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महतारी

April 17, 2013 Editor 1

– केशव मोहन पाण्डेय जोन्हिया काकी पता ना केतना दिन के भइली कि टोला भर के सभे काकीए कहेला. ऊ अपना टूटही पलानी में अकेले […]

उ बोलवले रहली

March 31, 2013 Editor 1

– राज गुप्त सुन्दर सिंह सीतापुर के राजा रहले. सीतापुर राज के एगो रसम-रिवाज रहल कि हर दशहरा पर दुर्गा जी के बरात सजि-धजि के […]

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पोसुआ

February 27, 2013 Editor 2

– डा॰अशोक द्विवेदी दूबि से निकहन चउँरल जगत वाला एगो इनार रहे छोटक राय का दुआर पर. ओकरा पुरुब, थोरिके दूर पर एगो घन बँसवारि […]