पूर्वांचल एकता मंच,नई दिल्ली के आयोजन में भइळ 10वां विश्व भोजपुरी सम्मेलन (विभोस) में चर्चित कवि आ साहित्यकार गंगा प्रसाद अरुण के हस्तलिखित (हाथ से लिखल फांट में) भोजपुरी गजल संग्रह “गजल गवाह बनी” के लोकार्पण मुख्यअतिथि आ लोकसभा अध्यक्ष रहल मीरा कुमार के हाथ से भइल. सम्मेलन दादादेव मेलापूरा पढ़ीं…

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तीन डेगे त्रिलोक             “तीन डेगे त्रिलोक” गंगा प्रसाद ‘अरुण’ के भोजपुरी हाइकु संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में सिंह्भूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद्, कृष्णा भवन, विवेक नगर, छोटा गोविंदपुर, जमशेदपुर-831015 से भइल बा. एकर कीमत 100 रुपिया बाटे. मानवीय संवेदना के गीतकारपूरा पढ़ीं…

– गंगा प्रसाद अरुण संता, जाने कइसन महभारत फेर आइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! केकर कइसे गोड़ कबारीं केकरा के कइसे हम जारीं डेगे-डेग इहाँ पर लाखा-घर सिरजाइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! अनकर अस्तर-सस्तर बोले बीचे धरम-जूझ मन डोले जोधा बर्हमफाँस में एकइस के अझुराइल बाटे चकराबिहू रचाइलपूरा पढ़ीं…

(1) छलकत तलफत नजर, त बरबस गजल भइल. लहसल लहकत दहर, त बरबस गजल भइल. अद बद पनघट पर जब परबत पसर गइल, सइ-सइ लहरल लहर, त बरबस गजल भइल. चटकल दरपन चमकल दहक-सहक बन-बन, समय गइल जब ठहर, त बरबस गजल भइल. अलकन पर, मद भरल नयन, मनहर तनपूरा पढ़ीं…