No Image

गजल

March 7, 2016 Editor 0

– अशोक द्विवेदी आपन भाषा आपन गाँव, सुबहित मिलल न अबले ठाँव । दउरत-हाँफत,जरत घाम में, जोहीं रोज पसर भर छाँव । जिनिगी जुआ भइल […]

Advertisements
No Image

गज़ल

October 10, 2015 Editor 0

– डा0 अशोक द्विवेदी कुछ नया कुछ पुरान घाव रही तहरा खातिर नया चुनाव रही । रेवड़ी चीन्हि के , बँटात रही आँख में जबले […]

No Image

दू गो गजल ऋतुराज के

May 18, 2015 Editor 0

– ऋतुराज (1) चाननी जइसन रूपवा के तोड़ नइखे भोर, भोर हो गइल ऊ अॅंजोर नइखे. चुप कराईं त आउर ज़ोर से बाजे तोहरा पायल […]

No Image

आसिफ रोहतासवी के दू गो गजल

March 31, 2015 Editor 0

-आसिफ रोहतासवी (एक) फेड़न के औकात बताई कहियो अइसन आन्ही आई. घामा पर हक इनको बाटे पियराइल दुबियो हरियाई. पाँव जरे चाहे तरुवाए चलहीं से […]

No Image

गजल

-आसिफ रोहतासवी अब ना बाँची जान बुझाता बाबूजी लोग भइल हैवान बुझाता बाबूजी पढ़ल लिखल हमनी के सब गुरमाटी बा उनका वेद कुरान बुझाता बाबूजी […]

No Image

गजल

September 2, 2013 Editor 1

– मनोज भावुक वक्त के ताप सहहीं के बाटे बर्फ से भाप बनहीं के बाटे पाप के केतनो तोपी या ढ़ाँपी एक दिन ओकरा फरहीं […]

No Image

भोजपुरी गजल

August 24, 2013 Editor 3

– मनोज भावुक जिनगी भूलभुलइया हम हेरा जातानी. गलती उनकर बाटे हम घेरा जातानी. उ सरवा निर्लज्ज ह हम डेरा जातानी. ताकत होइहें पत्नी हम […]

No Image

केशव के गजल – 3

February 22, 2013 Editor 2

– केशव मोहन पाण्डेय दहशत के किस्सा त दर्दनाक होइबे करी। ग़म के दौर में ख़ुशी इत्तेफाक होइबे करी।। माचिस के तिल्ली कबले खैर मनाई […]

No Image

दू गो गजल

September 2, 2011 OmPrakash Singh 13

– रामरक्षा मिश्र विमल 1 शहर में घीव के दीया जराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता जोग कुछ दिन से […]