– गिरिजाशंकर राय ‘गिरिजेश’ पाकिस्तान के मारि के हमार सिपाही ओकर छक्का छोड़ा दिहलन सऽ. चीन क कुल्हि चल्हाँकी भुला गइल. मिठाई खाइब… हो… हो. ईहे हई नगरी, जहाँ बाड़ी बनरी, लइकन क धइ-धइ खींचेली टँगरी. एगो बीड़ी बाबू साहेब, ना सिगरेट पियला से करेजा जरेला. हो… हो बेईमान…. हमरापूरा पढ़ीं…

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मशहूर भोजपुरी साहित्यकार गिरिजाशंकर राय गिरिजेश के निधन शनिचर का दिने बनारस में हो गइल जहाँ उनुकर इलाज चलत रहुवे. छिहत्तर साल के गिरिजेश राय लमहर समय से बेमार रहलन आ इलाज खातिर उनुका के गोरखपुर से बनारस भेजल गइल रहुवे. निधन का बाद उनकर अंतिम संस्कार बनारसे का हरिश्चन्द्रपूरा पढ़ीं…