चन्द्रदेव यादव के पांच गीत

March 16, 2017 Editor 0

– चन्द्रदेव यादव (एक) पवन पानी धूप खुसबू सब हकीकत ह, न जादू ! जाल में जल, हवा, गर्मी गंध के, के बान्ह पाई? रेत […]

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दू गो गीत

April 6, 2016 Editor 0

– अक्षय कुमार पाण्डेय (1) बसन्त चमचम चमके लागल पीतर सोना जइसन भाई – समझऽ अब बसन्त आइल हऽ। पुरुवा से पछया झगरत बा दुपहर […]

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दू गो गीत

May 23, 2014 Editor 0

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पहिल गीत कवन गाईं एह गीतन का गाँव में पाहुन-सन मन रहल लजाइल. धनखेती में फूटल सोना रुपनी बइठल बीनत मोना […]

जुलूम कइलस रे…..

December 7, 2013 Editor 0

– ओमप्रकाश अमृतांशु कांचे कोंपलवा मड़ोड़ि दिहलस रे, इंसान रूपी गीधवा जुलूम कइलस रे. खेलत-कुदत-हँसत रहले हियरवा, अनबुझ ना जाने कुछु इहो अल्हड़पनवा, रोम-रोम रोंवां […]

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गीत

May 7, 2012 OmPrakash Singh 1

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के […]

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गीत

May 6, 2012 OmPrakash Singh 2

– मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस […]

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फागुन के तीन गो गीत

March 7, 2012 OmPrakash Singh 1

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एक लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे ! धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित […]

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गीत

October 14, 2011 OmPrakash Singh 3

– डा॰अशोक द्विवेदी रतिया झरेले जलबुनिया फजीरे बनि झालर, झरे फेरु उतरले भुइयाँ किरिनिया सरेहिया में मोती चरे ! सिहरेला तन, मन बिहरे बेयरिया से […]