– केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल झुमेला नगरिया नू हो।। गरजि-चमकि मेघपूरा पढ़ीं…

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– पाण्डेय हरिराम कृषिर्भूवाचक: शब्दोणश्च निवृतिवाचक: तयोरैक्यं परंब्रह्म इत्यभिधीयते (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्मखंड 28 ) कहे के माने कि “कृष… सत्ता के कहाला. अतुलित सत्ता के नाम कृष्ण ह. ..ण.. के मतलब होला मुक्त भइल, आनन्दित भइल. एही असीमित सत्ता, सार्वभौमिकता, आ असीमित आनन्द के मिला के कृष्ण बनेला. बाकिर आजपूरा पढ़ीं…