भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा कि भोजपुरी में प्रकाशनपूरा पढ़ीं…

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आजु दस साल पूरा कर के एगारहवाँ साल में प्रवेश करत बिया अँजोरिया. एह दस साल में बहुते कुछ देखे सुने सीखे के मिलल. बहुते लोग आइल, मिलल, बतियावल, झगड़ल, आ अपना अपना राहे चल निकलल. रह गइनी हम, अँजोरिया आ रउरा सभे. अगर रउरा लोगिन के सहयोग, नेह नापूरा पढ़ीं…

पिछला दस साल से भोजपुरी के वेबसाइट चलावत अपना अनुभव से इहे सिखले बानी कि भोजपुरी में वेबसाइट चलावल बहुते मुश्किल काम होला. सबसे पहिले भोजपुरी में वेबसाइट शुरू भइल रहे अँजोरिया. एकरा बाद बहुते वेबसाइट अइलीं स. कुछेक त बहुते मजगर तरीका से निकलली सँ बाकिर गँवे गँवे सभकरपूरा पढ़ीं…

ई एगो बड़हन सवाल बा. आ एकर जवाब कवनो एक आदमी ना दे सके. एहसे ई सवाल रउरा सभका सोझा राखत बिया अँजोरिया कि एह सवाल के जवाब खोजल जाव. रउरा सभे से निहोरा बा कि आपन राय विस्तार से अँजोरिया के भेजीं, एहिजा छोटहन कमेंट दे के ना. सभकरपूरा पढ़ीं…