– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) घर का फोन में एसटीडी रहे. पूजा नम्बर मिलावे लगली. दूनो बच्चा दूर पलंग पर बैठ के शून्य में निहारे लगले. विपत्ति महसूस करेके क्षमता बच्चन में बड़कन से अधिके होला. बहुते कोशिश के बादो अर्चना के फोन ना लागल.पूरा पढ़ीं…

Advertisements

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) मुजफ्फरपुर इमलीचट्टी होके ऊ यूनिवर्सिटी पहुंचलन. उहां केमिस्ट्री विभाग में गइलन. विभागाध्यक्ष के कमरा बंद रहे. ऊ अर्दली से पुछलन – ‘डॉ.शाही ?’ अर्दली एगो कागज पर उनकर नाम आ आवे के कारण लिखवा के अन्दर गइल. आके कहलस –पूरा पढ़ीं…

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) सब लोग के पहिला गिलास खतम होखे पर आइल. सबकर नजर जुगेसर के भरल गिलास पर पड़ल. एक साथे सभे बोल उठल – ‘पहिला खतम कइल जाव. फेर इच्छा होई त लेब.’ जुगेसर कइसहूं सांस बंद कर के पी गइलन.पूरा पढ़ीं…

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’ -‘हम त रिजल्ट का बादे लाग गइनी इहां. बिहार के त पालटिक्स समझते बाड़. हमपूरा पढ़ीं…

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय योगेश्वर नाम रखले रहस उनकर मास्टर चाचा जवन कलकाता में पढ़ावत रहस. स्कूल में भरती का समय राउत जी मास्टर साहेब ठीक (!) कइलन युगेश्वर. लेकिन गांव में सबका खातिर उ जिंदगी भर आ मरलो के बाद जुगेसरे रहस. शिवदत्त महतो के बेटा जुगेसर परसाद. बड़ापूरा पढ़ीं…

आदर्श युवक के सम्मोहक प्रेम के सूत्र में बंधल सामाजिक ताना बाना ‘जुगेसर’ उपन्यास एगो अइसन व्यापक फलक वाला आधुनिक उपन्यास ह जवना में गांव अउर शहर दूनों के सामाजिक परिस्थिति अउर चुनौती के वस्तुपरक ढंग से बहुत व्यापक अर्थ में चित्रण बा. कथानक के पात्र खाली व्यक्ति ना हउअनपूरा पढ़ीं…