सहकल, बहकल आ डहकल के चरचा करे के मन करत बा आजु. काहे कि देश में कुछ लोग के अतना सहका दिहल गइल बा कि ऊ बहकल बन गइल बाड़े आ एह बात के कवनो चिन्ता नइखन करत कि उनकर बेवहार केहू के डहकावतो बा. सहके से सहकत, बहके सेपूरा पढ़ीं…

Advertisements