पंडित विद्यानिवास मिश्र के जयंती का मौका पर 14 जनवरी 2015 का दिने भोजपुरी के महान साहित्यकार डा॰ अशोक द्विवेदी के ‘लोककवि सम्मान’ से सम्मानित कइल जाई. पंडित विद्यानिवास मिश्र के स्मृति में दिहल जाए वाला पुरस्कार खातिर एगो चयन समिति सुनीता जैन का अध्यक्षता में बनल रहे. सदस्य रहलेपूरा पढ़ीं…

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भोजपुरी अबहीं संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल होखे खातिर संघर्ष करत बिया. जबकि भारत के साहित्य अकादमी भारतीय साहित्य निर्माता का रूप में भिखारी ठाकुर आ धरीछन मिश्र का बाद अब भोजपुरी के नामी गिरामी कवि मोती बीए पर एगो किताब प्रकाशित कइलसि ह. इहे ना बलुक पछिला बरिसनपूरा पढ़ीं…

– डा॰अशोक द्विवेदी कविता का बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति ह. कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना शक्ति से भाषा का जरिए कविता के रूप देला. कवनो भाषा आ ओकरा काव्य-रूपनपूरा पढ़ीं…

– डा॰अशोक द्विवेदी जाड़े ठिठुरत, गांव के लोग, सांझि होते आड़-अलोत दुआर-मड़ई भा कउड़-बोरसी धऽ लेला. जे जहां बा, आ जइसे, सांझि के देंहि चीरत-सितलहरी आ घोरियावत कुहेस का डरे, आड़-अलम तक पहुंचे के तेजी मे रहेला. खाए के जौन दू चार कौर गरम-सेराइल मिलल तौन बहुत बा, पुअरा कपूरा पढ़ीं…

– डा॰अशोक द्विवेदी तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? खाए के बा अखरा रोटी सूते के बा घास-पात पर! तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? अपना खातिर, तोहरा खातिर भा अझुराइल सपना खातिर विघटब-टूटन-फिसलन वाला नव समाज के रचना खातिर? जागत-जागत, मन रिसिआला जर भुन जालापूरा पढ़ीं…

– डा॰अशोक द्विवेदी गोहिया मार चाहे सटहा के होखे चाहे जहर बुझल बात के मार से पीठि पर उखड़ल गोहिया त लउकेला बाकि मन पर परल करिया रेघारी भा अन्तर में उखड़ल गोहिया ना लउके ना लउके दुर्दिन आ दुर्भाग में लागल गहिर ठेस. बोझा बोझा चाहे औकात ले ढेरपूरा पढ़ीं…