जिये-जियावे क सहूर सिखावत अमानुस के मानुस-मूल्य देबे वाली ‘गंगा-तरंगिनी’ ‘गंगा-तरंगिनी’ (काव्य-कथा) अभिधा प्रकाशन, मुजफ्फरपुर. मूल्य – पचास रुपये. प्रथम संस्करण. कवि – रविकेश मिश्र (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 22वी प्रस्तुति) – सांत्वना द्विवेदी गंगा के दूनो पाट मनुष्य के जिये आ जियावे के सहूरपूरा पढ़ीं…

Advertisements

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 12वी प्रस्तुति) – आनन्द संधिदूत ओनइसवीं सदी के आखिरी दशक आवत-आवत ददरी के मेला बलिया में एगो दुर्घटना घट गइल. भइल ई कि कातिक के प्रमुख नहान आ बकरीद एके दिन पड़ गइल. नतीजा ई भइल कि हिन्दू-मुसलमान दूनो का हामाहूमीपूरा पढ़ीं…