(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) उपन्यास का बारे में “लोक कवि अब गाते नहीं” सिर्फ भोजपुरी भाषा, ओकरा गायकी, आ भोजपुरी समाज के गिरावट के कहानिये भर ना ह, बलुक लोक भावना आ भारतीय समाज के संत्रास के आइनो ह. गाँव के निर्धन, अनपढ़,पूरा पढ़ीं…

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