– देवेन्द्र आर्य आजादी क बाद शायद ई पहिला बेर भइल बा कि मिलल पुरस्कार लवटावे वालन के लाईन लागल जात बा. अलग अलग भाषा, प्रदेश आ विचारधारा के लिखनिहार लोग के साहित्य अकादमी से मिलल सम्मान एलानिया वापस करे के निहुरी राजनीति पाक-साफ लउके वाला लोग के चिन्ता मेंपूरा पढ़ीं…

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– देवेन्द्र आर्य दलित विचार का बारे में राजनीतिक सोच जतने व्यावहारिक, साफ आ मकसद वाला लउकेला, साहित्यिक सोच ओतने अझुराह, भकुआइल, ठहरल आ भेड़चाल वाला बा. अम्बेडकर से लगवले कांसीराम-मायावती तक के राजनीतिक नजरिया साफ बा कि सत्ता में दलितन के हिस्सेदारी तय करवले बिना सदियन से चलल आवतपूरा पढ़ीं…

– देवेन्द्र आर्य जाए के उमिरो ना रहल आ अइसन कवनो जल्दबाजिओ ना रहुवे. निकहा नीमन चलत गोष्ठी के परवान चढ़ा, ईद के मुबारकबाद देत आखिरी सलाम क लिहलन. ना दोस्तन के कुछ करे के मौका दिहलन ना घरवालन के. दिल के दर्द के गैस समुझत रह गइलन आ चलपूरा पढ़ीं…