अगिला लोकसभा चुनाव में अब सालो भर नइखे रहि गइल. अबकि के चुनाव देश के जीवन मरण के सवाल होखे जा रहल बा एहसे सभकर जिम्मेदारी बा कि आपन निजी फायदा-नुकसान से उपर उठिके देश के फायदा-नुकसान का बारे में सोचत आपन भोट देव. दुनु तरफ परिवारे बाड़ी सँ. भापूरा पढ़ीं…

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हम त अपना बेटा से परेशान बानी. 60 हजार रुपिया मकान से किराया मिलेला आ ऊ हमनी के साठो रुपिया ना देव. हम मरद मेहरारू कबो कवनो रिश्तेदार के दीहल खाना खा लेलीं त कबो रो रो के रात बीता देनी सँ. अपने घर में बेगाना बना दीहल गइल बापूरा पढ़ीं…