– कामता प्रसाद ओझा ‘दिव्य’ अन्हरिया….. घोर अन्हरिया…. भादो के अन्हरिया राति. छपनो कोटि बरखा जइसे सरग में छेद हो गइल होखे. कबहीं कबहीं कड़कड़ा के चमकि जाता त बुझाता जे अबकी पहाड़ के छाती जरूरे दरकि जाई. मातल पिअक्कड़ अस झूमि झूमि अन्हड़, गाछ-बिरिछि पर आपन मूँड़ी पटकत बा.पूरा पढ़ीं…

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– गिरिजाशंकर राय ‘गिरिजेश’ पाकिस्तान के मारि के हमार सिपाही ओकर छक्का छोड़ा दिहलन सऽ. चीन क कुल्हि चल्हाँकी भुला गइल. मिठाई खाइब… हो… हो. ईहे हई नगरी, जहाँ बाड़ी बनरी, लइकन क धइ-धइ खींचेली टँगरी. एगो बीड़ी बाबू साहेब, ना सिगरेट पियला से करेजा जरेला. हो… हो बेईमान…. हमरापूरा पढ़ीं…

– ईश्वरचन्द्र सिन्हा सिंहवाहिनी देवी के सालाना सिंगार के समय माई के दरबार में जब चम्पा बाई अलाप लेके भैरवी सुरू कइलिन, त उहाँ बइठल लोगन क हाथ अनजाने में करेजा पै पहुँच गयल. रात भर गाना सुनत-सुनत जे झपकी लेवे सुरू कय देहले रहल, ऊहो अचकचाय के उठ बइठल,पूरा पढ़ीं…

अभाव आ गरीबी पहिलहूँ रहे. दुख-दलिद्दर अइसन कि रगरि के देंहि क चोंइटा छोड़ा देव. लोग आपुस में रोइ-गाइ के जिनिगी बिता लेव, बाकिर मन मइल ना होखे देव. हारल-थाकल जीव के प्रेमे सहारा रहे. धीरज आ बल रहे. आजु एतना तरक्की आ सुबिधा-साधन का बादो लोग अपने में बाझल-हकासल,पूरा पढ़ीं…

“‘पाती’ पत्रिका भोजपुरी रचनाशीलता के आंदोलन के क्रांति-पताका हऽ. ‘पाती’ माने, नयकी पीढ़ी के नाँवे सांस्कृतिक चिट्ठी. एगो चुपचाप चले वाला सांस्कृतिक आंदोलन हवे ‘पाती’, जवना के अशोक द्विवेदी अपना संसाधन से चुपचाप चला रहल बाड़े.” ई उद्गार सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो॰ केदारनाथ सिंह (प्रो॰ एमरिटस, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान)पूरा पढ़ीं…

– प्रगत द्विवेदी हमनी के भोजपुरिया लोगन में कम ‘क्रियेटिविटी’ नइखे. जोगाड़ पर काम चलावे आ लोके-लहावे के चलन हमनी क खासियत मनाला. हमनी में से कतने लोग बिना सुबिधा संसाधन आ बे साज-समान के अतना गजब का ऊँचाई प चहुँपल कि देखि के तयजुब होई. बाकि सफलता का ऊँचाईपूरा पढ़ीं…

– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर साहित्य-सेवी आ लेखक लोग के साधुवाद! सँगे-सँगे हरपूरा पढ़ीं…

पंडित विद्यानिवास मिश्र के जयंती का मौका पर 14 जनवरी 2015 का दिने भोजपुरी के महान साहित्यकार डा॰ अशोक द्विवेदी के ‘लोककवि सम्मान’ से सम्मानित कइल जाई. पंडित विद्यानिवास मिश्र के स्मृति में दिहल जाए वाला पुरस्कार खातिर एगो चयन समिति सुनीता जैन का अध्यक्षता में बनल रहे. सदस्य रहलेपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी अबहीं संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल होखे खातिर संघर्ष करत बिया. जबकि भारत के साहित्य अकादमी भारतीय साहित्य निर्माता का रूप में भिखारी ठाकुर आ धरीछन मिश्र का बाद अब भोजपुरी के नामी गिरामी कवि मोती बीए पर एगो किताब प्रकाशित कइलसि ह. इहे ना बलुक पछिला बरिसनपूरा पढ़ीं…

– प्रगत द्विवेदी बचपन से आजु ले पिताजी के भोजपुरी-भोजपुरी रटत देखत अइलीं. ऊ आजु ले ना थकलन, बाकिर हमनी का जरूर घबड़ा गइली जा. भोजपुरी के पहिचान, ओकरा प्रसार आ विकास के बात-बखान सुनत हम बलिया से आके दिल्ली रहे लगनी बाकि आजु ले हमके ई ना बुझाइल किपूरा पढ़ीं…

अतवार का दिने बलिया में ‘हिंदी के भेद से भाषिक अस्मिता को नुकसान’ विषय पर बोलावल गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि आइल विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय सचिव डॉ.अरुणेश नीरन कहलन कि हिंदी के श्रेष्ठ साहित्य लोके भाषन में रचाइल बा. कहलन कि भोजपुरी साहित्यो के हिंदीए के साहित्य मानेपूरा पढ़ीं…