– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में थउस जाला, बाकिर तवना खातिर तहरा मने ना कवनो मोह ना माया। के जाने कवन कुमुर्खी तहरा घेरले बा किपूरा पढ़ीं…

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– डा0 प्रकाश उदय केहू दिवंगत हो जाला त आमतौर पर कहल जाला कि भगवान उनुका आत्मा के शांति देसु। हमार एगो कवि-मित्र कहेले कि बाकी लोग के त पता ना, बाकिर कवनो रचनाकार खातिर अइसन बात ना कहे के चाहीं। शान्त आत्मा से कवनो रचना त हो ना पाईपूरा पढ़ीं…

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई अउर पाती सांस्कृतिक मंच के एगो बड़हन आयोजन पिछला अतवारा का दिने बलिया के टाउन हाल बापू भवन में भइल. एह आयोजन के पहिला सत्र में पाती संपादक डा॰ अशोक द्विवेदी, प्रो॰ अवधेश प्रधान आ प्रो॰ सदानन्द शाही का हाथै एह साल के “पातीपूरा पढ़ीं…

– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं जे’ काहे के कहे के परित? काहे के कबो कविता, कबोपूरा पढ़ीं…

– प्रकाश उदय भउजी माने झगरी पानी माने मछरी – ना धइला खतिरा बूड़ि बूड़ि पोखरा नहइला खतिरा. मारे-मारे उपटी भईयो जी के डपटी छोड़इला खतिरा. “बाचा बाटे” कहि के छोड़इला खतिरा. सरदी में हरदी पियाई जबरजस्ती दवइया खतिरा घासो गढ़े जाए ना दी गईया खतिरा. कमरा प कमरा ओपूरा पढ़ीं…

डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’ ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं जे’ काहे के कहे के परित, काहे के कबो कविता, कबो कहनी,पूरा पढ़ीं…