बीतल 10 जुलाई 2016, अतवार का दिने गोरखपुर के भोजपुरी लिखनिहारन के संस्था ‘भोजपुरी संगम’ के 77वीं ‘बइठकी’ संस्था के संस्थापक रहल स्व. सत्तन जी के मकान पर, खरइया पोखरा, बसारतपुर (मेडिकल रोड पर), गोरखपुर में आयोजित भइल. कार्यक्रम क शुरुआत सुधीर श्रीवास्तव के सरस्वती वंदना से शुरु भइल. एकरापूरा पढ़ीं…

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– देवेन्द्र आर्य जाए के उमिरो ना रहल आ अइसन कवनो जल्दबाजिओ ना रहुवे. निकहा नीमन चलत गोष्ठी के परवान चढ़ा, ईद के मुबारकबाद देत आखिरी सलाम क लिहलन. ना दोस्तन के कुछ करे के मौका दिहलन ना घरवालन के. दिल के दर्द के गैस समुझत रह गइलन आ चलपूरा पढ़ीं…

अंगरेजन का समय में त भोजपुरी के सम्मान मिलत लउकल बाकिर आजादी के बाद से एकर दसा ढंङ से गड़बड़ाइल ह. गोरखपुर में भोजपुरी संगम के इकतिसवीं बइठकी के अध्यक्षता करत ई बाति डा॰ आद्या प्रसाद द्विवेदी जी कहलीं. उहाँ के एगो उदाहरन देत बतवलीं कि गोरखेपुर के रहे वालापूरा पढ़ीं…

गोरखपुर के भोजपुरी साहित्यकारन के संस्था “भोजपुरी संगम” के बइठकी हर महीना करावल जाले. २८वीं बइठकी पिछला १० जून के साहित्यकार सत्यनारायण सत्तन का घरे भइल रहे जवना के अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो॰ सुरेन्द्र दुबे कइले रहनीं. एह बइठकी का पहिलका सत्र में (बिना बैनरवाला फोटो मेंपूरा पढ़ीं…

गोरखपुर के भोजपुरी संगम के छब्बीसवीं बइठकी पिछला ८ अप्रेल २०१२ के डा॰ सत्यमवदा शर्मा “सत्यम” के शाहपुर आवास पर भइल. एकरे पहिले पारी में युवा कहानीकार अवधेश शर्मा “सेन” के कहानी “बदलाव” पर बातचीत में कवि , साहित्यकार रूद्रदेव नारायण श्रीवास्तव के आलेख पढ़त डा॰ अभिजीत शुक्ल कहलीं किपूरा पढ़ीं…