बतकुच्चन आ समाचारन में कवनो संबंध ना होखे बाकिर समाचारन से बतकुच्चन करे के मसाला मिलत रहेला. अब देखीं ना, फोने क के एगो नामी वकील अपना नामी आरोपी के जमानत दिआ दिहलें. ई नामी वकील जब सरकार में मंत्री रहलें तब ओह नामी आरोपी के सरकार का तरफ सेपूरा पढ़ीं…

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बात धरमपत्नी से बढ़ के गोत्र आ कुल खानदान पर आ गइल बा. एगो गोत के लोग दोसरा गोत के उपद्रवियन के गोतिया का बता दिहल कि सामने वाला बात के ले उड़ल आ ओकरा के अपना जाति के अपमान बतावे लागल. थोड़ देर ला हमहू चकरा गइनी कि गोत्रपूरा पढ़ीं…

दिमाग में अगिला बतकुच्चन के ताना बानबुनत जात रहनी तबले रमचेलवा भेंटा गइल. देखते पूछलसि, ए बतकुचन, बतावऽ धरमपत्नी त होला बाकिर धरमपति काहे ना होखे. बूझ गइनी कि बाबा लस्टमानंद से कुछ सीख के आइल बा आ उनुके कहल बात पर हमरा के अजमावल चाहत बा. अब बाबा ठहरलेपूरा पढ़ीं…

जनतब, अनचिन्हार आ परिचिताह. तीनो के तीनो जान-पहचान से जुड़ल शब्द आ आजु के बतकुच्चन एकनिए पर. जनतब के जगहा हिन्दी में जंतव्य ना होखे आ हिन्दी के गंतव्य का जगहा भोजपुरी में गनतब ना भेंटाव. परिचित त हिन्दीओ में भेंटा जाई बाकिर परिचिताह भोजपुरिए में मिलेला, हिन्दी में नइखींपूरा पढ़ीं…

पिछला बेर दहल, दहलल, आ दलकल के चरचा पर बात रोकले रहीं आजु ओहिजे से आगा बढ़ल चाहब. बाकिर बचपन के याद आवत बा जब सियालदह लोकल में एगो किताब बेचे वाला बुझउवल बुझा बुझा के आपन किताब बेचत रहे. पूछे कि बताईं कि कवन कवन खाना खाइल ना जाव?पूरा पढ़ीं…

सहकल, बहकल आ डहकल के चरचा करे के मन करत बा आजु. काहे कि देश में कुछ लोग के अतना सहका दिहल गइल बा कि ऊ बहकल बन गइल बाड़े आ एह बात के कवनो चिन्ता नइखन करत कि उनकर बेवहार केहू के डहकावतो बा. सहके से सहकत, बहके सेपूरा पढ़ीं…

ए सूरदास, घीव पड़ल? कड़कड़ाव तब नू जानी. कारण आ परिणाम के एह उदाहरण में परिणाम से पता चलत बा कारण का बारे में. सूरदास खातिर परिणामे प्रमाण बा कि कारण मौजूद हो गइल. हालांकि केहू के हवा से अगर कवनो गोल के लगातार जीत मिलल जात होखे त कहलपूरा पढ़ीं…

अर्थ का बिना सबकुछ व्यर्थ होला. चाहे ऊ कवनो बाति होखो भा आदमी. कुछ दिन पहिले हम कहले रहीं अर्थ, अनर्थ, कुअर्थ वगैरह के चरचा के बात. फेर बीच में कुछ दोसर बाति निकलत गइल बाकिर ऊ बाति बिसरल ना रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी. रहीम केपूरा पढ़ीं…

पिछला 2 नवंबर का दिने मारीशस आप्रवासियन के अइला के 180वां सालगिरह मनवलसि. एही दिने भारत से गइल गिरमिटिहा मजदूर पहिला बेर मारीशस का किनार पर पानी के जहाज से आ के उतरल रहले. आ हमरा बतकुच्चन के मसाला मिल गइल. आप्रवासी शब्द पढ़ के हम सोचे लगनी कि वासीपूरा पढ़ीं…

एगो गति संज्ञा होले आ दोसरका गति भा गत विशेषण. दुनू में छोटकी इ के मात्रा लागेला बाकिर दोसरका गति से छोटकी इ के मात्रा हट गइल काहे कि उ मात्रा छोटको ले छोटकी इ के रहुवे जवन बोले में त सहज लागी बाकिर लिखत में असहज क देले. जइसेपूरा पढ़ीं…

अइसन कबो ना होखे जब हम बतकुच्चन लिखे से पहिले मगजमारी करत शब्द कोश भा व्याकरण के किताब ना पलटत होखीं. कबो नया नया कुछ खोजे ला त कबो दिमाग में आइल कवनो बात के आधार बनावे ला. अबकियो उहे भइल. पिछला दिने एगो राजनीतिक अखबार के संपाक लिख मरलेपूरा पढ़ीं…