– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता लिखले रहीं कि नाम में का धइल बा आ एह हफ्ता फेरु नामे के चरचा ले के बइठ गइनी. बाकि करीं त का ? कुछ दिन पहिले ले नोटबन्दी के चरचा रहुवे. कहीं से शुरू करीं बात घुमा फिरा के नोटबन्दी प आ जातपूरा पढ़ीं…

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