लमहर समय से नीमन नीमन बाल साहित्य रचत आवत भोजपुरी हिन्दी के अनन्य  साधक भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के आजु उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का तरफ से दू लाख रुपिया नगद पुरस्कार का साथे बाल साहित्य भारती सम्मान से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाथ से सम्मानित कइल गइल ह. अँजोरिया केपूरा पढ़ीं…

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– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरिया समाज शुरूए से कबो ना थाकेवाली मेहनत, जीवटता, संघर्षशीलता, अपना दम-खम आउर बल-बेंवत का बदउलत मनमाफिक मुकाम हासिल करे खातिर जानल जाला। ‘कर बहियाँ-बल आपनो, छाड़ि बिरानी आस’ इहवाँ के मनई के मूल मंतर रहल बा। तबे नू, खाली देसे में ना, बलुक विदेसो मेंपूरा पढ़ीं…

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई अउर पाती सांस्कृतिक मंच के एगो बड़हन आयोजन पिछला अतवारा का दिने बलिया के टाउन हाल बापू भवन में भइल. एह आयोजन के पहिला सत्र में पाती संपादक डा॰ अशोक द्विवेदी, प्रो॰ अवधेश प्रधान आ प्रो॰ सदानन्द शाही का हाथै एह साल के “पातीपूरा पढ़ीं…

बलिया का श्रीराम विहार काॅलोनी में स्थित ‘पाती’ कार्यालय में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया ईकाई का तरफ से आयोजित एगो कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से निराला पुरस्कार से सम्मानित आ भोजपुरी अउर हिन्दी के चर्चित कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी के सम्मानित कइल गइल. भगवती प्रसाद द्विवेदी केपूरा पढ़ीं…

– भगवती प्रसाद द्विवेदी ओइसे त हिन्दी में निबंध-युग के श्रीगणेश 1850 से मानल जाला आ हिन्दी निबंध के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के कहल जाला. हालांकि भारतेन्दु युग का पहिलहूँ निबंध लिखाते रहे आ ओह घरी के निबंधकारन में राम प्रसाद निरंजनी महर्षि दयानन्द आ श्रद्धाराम फुल्लौरी वगैरह के नांवपूरा पढ़ीं…

– भगवती प्रसाद द्विवेदी सोगहग लवटब हम तहरा लगे / तहरा में जइसे लवटेले स पखेरू डैना फड़फड़ावत चहचहात ठोर चुँगियावत अपना खोंता में जइसे लगहर गाय के थान से सटल मुँह मारत बछरू लवटेला नाँद आ खूँटा का लगे जइसे लवटेलीं स बिल में गुर के भेली आ सातूपूरा पढ़ीं…

– भगवती प्रसाद द्विवेदी हमार नाँव सुनिके बड़ा ललक से आइल रहले ऊ मिले बाकिर भेंटात कहीं कि हो गइले उदास. शहर के हमरा खँड़हरनुमा खपड़पोश घर में नजर ना आइल दूरदर्शनी एंटिना के मायाजाल दूर-दूर ले ना लउकल वी॰सी॰पी॰ के दर्शनीयता पीए के दिहलीं हम फ्रिज का जगहा घइलापूरा पढ़ीं…