भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा कि भोजपुरी में प्रकाशनपूरा पढ़ीं…

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