राहि केतनो चलीं हम, ओराते न बा

December 20, 2016 Editor 1

(भोजपुरी ग़ज़ल) – शैलेंद्र असीम तहरी अँखिया में पानी बुझाते न बा पीर केतना सहीं हम, सहाते न बा रोज चूवेले टुटही पलानी नियन ई […]

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गजल

October 2, 2015 Editor 0

– डा0 अशोक द्विवेदी दउर- दउर थाकल जिनगानी कतना आग बुतावे पानी ! बरिसन से सपना सपने बा ; छछनत बचपन बूढ़ जवानी । हरियर […]

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भोजपुरी गजल

August 16, 2013 Editor 0

– मनोज भावुक (१) सर से हाथ हटा के देखीं , हाथ-पैर चला के देखीं, कुछ ना कुछ रस्ता निकली,बुद्धि के दउरा के देखीं पहिले […]