– रामरक्षा मिश्र विमल हिंदी लीखे में पानी छूटेला हमरा भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ? पग पग पर गूगल के सरन लिहींला कवनो भाषा से अनुवाद करींला भलहीं पेपर के कोश्चन बूझे ना केहू समझा-समझा के लिखवावत बानी भाई. बचने ना लिंगो पर आफति आई हाथी आ दहियो केपूरा पढ़ीं…

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मान  बढ़ाईं  जा माटी के    रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया  पन्ना  पलटल जाई  भारत माँ के  लोर के ?   तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब  ह  भारत  के  भाषा अपना जगह  सभे  कंचन बा  एको  ना  बाटे  काँसा हिन्दू  मुस्लिम  सिक्ख  ईसाई पूरा पढ़ीं…

– लाल बिहारी लाल कवन भूल भइल हमसे भारी विधाता दिहल तू अइसन नारी बात-बात पर गाल बजावे कह कछुओं तS आंख देखावे कलजुग के अइसन नारी विधाता दिहल तू…….. गहना किन तS खुस हो जाली सारी किन तS उS बरी सरमाली बुझसS ना कवनो लाचारी विधाता दिहल तू…….. दूधपूरा पढ़ीं…

– शशि प्रेमदेव ना सनेहि के छाँव, न ममता के आँचर बा गाँव में! का जाई उहवाँ केहू अब, का बाँचल बा गाँव में? छितिर बितिर पुरुखन के थाती, बाग-बगइचा, खपड़इला! खरिहानी में जगहे-जगहा जीव जनावर के मइला! ना कजरी के गूँज, ना फगुआ के हलचल बा गाँव में! आँगनपूरा पढ़ीं…

शिवभक्ति गीत – रामरक्षा मिश्र विमल सुनींले जे भोला बाबा हईं बड़ा दानी हमरो प किरिपा करीं तब हम जानीं. जानियो के भसमासुर के बरदान दिहलीं अपना बचाव खातिर भागल फिरलीं दानी में ना बाटे केहू शिवजी के सानी. बिष से तबाह भइल पूरा संसार जब पी गइलीं कइलीं नापूरा पढ़ीं…

मंगल के साँझ बलिया के लोग बापू भवन, टाउन हॉल, में भोजपुरी लोकरस में देर रात ले डूबल उतराइल. भोजपुरी गीतन से फूहड़पन हटावे का अपना अभियान के रचनात्मक तरीका से परंपरागत भोजपुरी गीतन के फेर से जीयतार बनावे का मकसद से बलिया के एगो सामाजिक सांस्कृतिक संस्था ‘पहल’ एहपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल हम छुट्टी ना रहला का कारन गायन के गिनल-चुनल कार्यक्रम दिहींले. एहसे जहाँ गावल असहज लागी, ओहिजा पहिलहीं मना कऽ दिहींले. पहिलहीं जानकारी ले लिहींले कि कवना तरह के प्रोग्राम बा आ के-के आवऽता. ठीक लागल त सँकार लिहलीं, नाहीं त कवनो बहाना कऽ केपूरा पढ़ीं…