– कुलदीप कुमार कहे के त कहल जाला कि जवन भासा रोजगार के मौका ना दिआ सके ओह भासा के अस्तित्व गँवे-गँवे खतम हो जाला. बाकिर ई बाति भोजपुरी प का साथे ठीक नइखे बइठत. सीधा से देखीं त अबहीं ले भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा नइखे मिलल बाकिर एह कापूरा पढ़ीं…

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– – ओमप्रकाश सिंह आजुए ईमेल से मिलल भोजपुरी पंचायत पत्रिका के नवम्बर 2014 अंक देखि के मन मिजाज खुश हो गइल. अगर भोजपुरी से छोह के बात हटा दिहल जाव त पत्रिका के कलेवर बहुते स्तरीय बा. सोना पर सोहागा वाला बाति होखीत अगर ई पत्रिका भोजपुरी में छपलपूरा पढ़ीं…

– मनोज श्रीवास्तव केहू के जब आपन खाली घर-दुआर आ आपन गाँव जवार छुटेला त मन केतना भारी हो जाला आ तब त आपन देसे छुटल रहे. ओह घरी कवनो सुख से केहू आपन घर-दुआर, गाँव-जवार भा देसे छोड़ के परदेस थोड़े गइल रहे लोग. खाली अपना परिवार के जीवनपूरा पढ़ीं…

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार आ भोजपुरी भाशा-साहित्य पर गोलियाइल राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘भोजपुरी पंचायत’ के सालाना महोत्सव 17 अगस्त 2013, शनिचर का दिने साँझ साढ़े चार बजे से दिल्ली के रफी मार्ग पर मौजूद “कंस्टीच्यूशनल क्लब” में होखे वाला बा. एह समारोह में अनेके काम मे लागल नामचीन हस्ती शामिलपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी पंचायत अगस्त २०१३ के अंक पिछलके हफ्ता आ गइल रहुवे हमरा मेलबाक्स में बाकिर कुछ अउरी काम में अझुराइल रहला का चलते अकर जानकारी देबे में तनी देर हो गइल बा. अबले के जवन हमार अनुभव रहल बा तवना हिसाब से भोजपुरी पंचायत के प्रकाशन नियमित होत आवत बा.पूरा पढ़ीं…

भोजपुरी स्वाभिमान के प्रतीक मासिक पत्रिका “भोजपुरी पंचायत” के अक्टूबर अंक के अगर राज ठाकरे पर केन्द्रित कहल जाव त बेजाँय ना कहाई. महाराष्ट्र केहु के बपौती ना ह, माफ करब असल मथैला ह “किसी की बपौती नहीं मुबंई” आ लेख हिन्दीए में बा, लेख आ अउरिओ ढेरहन सामग्री महाराष्ट्रेपूरा पढ़ीं…