– जयंती पांडेय जब से अखबारन में मार छपे लागल कि सरकार खेती के बढ़ावा देवे के खातिर कई-कई गो सुविधा दी तबसे गांव छोड़ के सात बरिस पहिले आइल टेकमन पंडित के नाती लुटमन तिवारी ‘दीपक’ उर्फ ‘दीपक एल एम’ गांव आके खेती करे खातिर आवे के मन बनावेपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय का हो राम चेला ई बरिस तऽ अंग्रेजी में लीप ईयर हऽ. लीप ईयर के अंग्रेजी में चाहे जवन माने होखे हमरा भोजपुरी में तऽ लीपले कहाई. मानें कि तीन साल जवन कलेंडर के गीने में गलती भईल ओकर चउथा बरिस के 60 वां दिने एक दिनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कलकाता अइले. उनका गांव के लोग इहां रहऽत रहे. ओहमें सबसे जियादा नांव रहे एकसिया बाबा के बेटा ठटपाल तिवारी के. अब बाबा उनका बाप से उनकर नांव पता ले लेहले आ पहुंच गइले खोजे. कलकाता के साल्ट लेक महल्ला आ सब केहु चेहरा परपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय लस्टमानंद के साथी नेताजी आजुकाल विपक्ष में बाड़ें आ उहवें एटमासफियर बनावे में लागल रहेले. ऊ जब कई दिन ले काला धन पर कुछ ना बोलले त लस्टमानंद के चिंता हो गइल कि कहीं सत्ता पक्ष में त ना डगरि गइलें. काहे कि भ्रष्टाचार आ घोटाला परपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला प्रधानमंत्री के इन्टरव्यू सुनि के एकदम से सेंटिमेंटल हो गइले आ मुड़ि पीटत सनकाह अस बाबा लस्टमानंद के दुअरा आ गइले. बाबा सामने खाड़ा रहले. रामचेला पूछले – बाबा ई का सुनऽतानी कि प्रधानमंत्री जी मजबूर बाड़े. बाबा कहले – ए बुड़बक, मजबूरिये से मजबूती आवेलापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय चौदह फरवरी सामने आ गइल बा. टेलीविजन पर ए घरी अभिये से “वेलेंटाइण डे” के ढेर परचार होखे लागल बा. केहू अपना वेलेंटाइन के हीरा के अँगूठी देबे के राय देता, त केहू सोना के हार, जेवर त केहू स्टाइलिस्ट घड़ी. केहू केहू त सुखले कागज परपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला एह जाड़ में सबेरे-सबेरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पहुँचले. बाबा घूरा तर बइठल रहले. संगे अउरो दू चार गो लोग रहे. बाबा के दंडवत बोल के राम चेला घूरा के लगे एगो पुअरा के बिड़ई पर बइठ गइले. राम निहोरा खइनी मलत रहले, बनवला के बादपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जब दुनिया भर में तरक्की के बयार बह रहल बा त बाबा लस्टमानंद के गाँव कइसे अछूता रहि जाई. ओह गाँव के जे सड़क पहिले ईंटा के रहल ह, ना त अलकतरा टूटल टाटल, अब उहाँ सीमिंट के रोड बन गइल बा आ गाँव के लइका दहेजपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय संसद के आखिरी दिन बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछलें, ई पीएसी आ जेपीसी का हऽ ? केहु नईखे पूछत कि का चाहीं. बस विपक्ष चिल्ला रहल बा कि दूनू चाहीं. आ सरकार के कहल हऽ कि जब एगो बा तऽ दोसरका का होई ? विपक्ष जिदिया गइलपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय सरकारी बीवी, बहू, समधिन, समधी लांग लाइफ काम देला लोग, रिटायर हो गइला के बादो. सरकारी होखला के फायदा रिटायर्ड होखला के बादे बुझाला. सरकारी आदमी के अरदवाय बेसी होला, ढेर दिन ले पेंशन खाला. जेतना वेतन ना पावे, ओकरा से बसी पेंशन पा जाला. पराइवेट नोकरीपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के संघतिया एगो बड़हन अखबार में फोटोग्राफर हवें. बड़ भाई दाखिल हवें. एक दिन देस में भ्रष्टाचार के लेके बड़ा चिंता जाहिर कइलें. कवनो काम नइखे होत. उनकर दुख देखि के बाबा कहलें हे भाई सुनऽ. तहरा बेसी चिंता कइला से कुछ होई ना, उल्टेपूरा पढ़ीं…