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अकिल आ भँईस

March 19, 2012 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय जब से अखबारन में मार छपे लागल कि सरकार खेती के बढ़ावा देवे के खातिर कई-कई गो सुविधा दी तबसे गांव छोड़ […]

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अब नांव के ले के परेशानी

February 23, 2012 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कलकाता अइले. उनका गांव के लोग इहां रहऽत रहे. ओहमें सबसे जियादा नांव रहे एकसिया बाबा के बेटा ठटपाल तिवारी […]

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काला धन आ नेताजी के बयान

March 6, 2011 OmPrakash Singh 1

– जयंती पांडेय लस्टमानंद के साथी नेताजी आजुकाल विपक्ष में बाड़ें आ उहवें एटमासफियर बनावे में लागल रहेले. ऊ जब कई दिन ले काला धन […]

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ई सरकार का हऽ

January 16, 2011 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय रामचेला एह जाड़ में सबेरे-सबेरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पहुँचले. बाबा घूरा तर बइठल रहले. संगे अउरो दू चार गो लोग रहे. […]

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सरकारी होखे के फायदा

December 11, 2010 OmPrakash Singh 1

– जयंती पांडेय सरकारी बीवी, बहू, समधिन, समधी लांग लाइफ काम देला लोग, रिटायर हो गइला के बादो. सरकारी होखला के फायदा रिटायर्ड होखला के […]

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वातावरण बनवले राखऽ भाई

December 5, 2010 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के संघतिया एगो बड़हन अखबार में फोटोग्राफर हवें. बड़ भाई दाखिल हवें. एक दिन देस में भ्रष्टाचार के लेके बड़ा […]

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नरक में सस्तई

October 21, 2010 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद रात में सुतल रहले. अचानक ऊ सपना देखे लगले कि एगो बड़हन मॉल (नया जमाना के बजार) में […]