भोजपुरी सिनेमा के अकेल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल अबकी मलेशिया में 21 जुलाई 2018 के होखे जा रहल बा. एह अवार्ड समारोह के जानकारी देत यशी फिल्म्स के अभय सिन्हा बतवलें कि एह अवार्ड समारोह में भोजपुरी मेगास्टार मनोज तिवारी, हिन्दी फिल्मों के सुनील शेट्टी, भोजपुरी सुपरस्टार रविकिशन, दिनेशलाल यादव निरहुआ,पूरा पढ़ीं…

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हे प्रचारक बन्धु, रउरा अपना गाहकन के सिनेमा आ कृति के प्रचार कइल आपन पेशा बनवले बानी जवन स्वागत जोग बा. बाकिर का कबो सोचले बानी कि भोजपुरी स‌िनेमा में आवत गिरावट के थोड़ बहुत जिम्मेदारी राउरो बनत बा. अउरी भाषा के सिनेमा इंडस्ट्री में प्रचारक लोग बा ओह लोगपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा आ गीतन में फूहड़ता आ नंगई पसारत धंधेबाजन आ ‘ले दही’ करत प्रचारकन के जाल में अझुराइल भोजपुरी के जान अब साँसत में पड़े लागल बा काहे कि एह लोग के बेवहार अब सीमा का बाहर जा के दबंगई आ धमकी के रूप लेबे लागल बा. भोजपुरी सिनेमापूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा में जब लेखक, निर्देशक, अभिनेता, गीतकार, निर्माता, कहानी लेखक सबकुछ एके आदमी हो सकेला त फिलिम बनला का बाद वितरक आ दर्शको के काम ओकरे पर रहे के चाहीं कि ना? फिलिम बनावल टीम वर्क होला बाकिर कुछ भोजपुरी फिलिमन में सगरी टीम के खरचा बचा के एकेपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा जगत में ई सबसे शर्म के बात सामने आल बा कि साल के खतम होखे से पहिलहीं साल के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के अवार्ड दे दिहल गइल बा. आ ई अवार्ड मिलल बा भोजपुरी सिनेमा जगत के सुपरस्टार कहाए वाला अभिनेता रविकिशन के. एह बात के पुष्टि संजय भूषणपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा इंडस्ट्री ला साल 2013 के अइसन साल का रूप में याद राखल जब दर्शक दिग्गज कलाकारन के फिलिमन के नकारत नयका कलाकारन के ले के बनावल बढ़िया फिलिमन के अधिका पसंद कइले. एह साल रिलीज “गंगा जमुना सरस्वती” से भोजपुरी फिल्म इडस्ट्री के ढेरहन उम्मीद रहुवे. एहमें रविपूरा पढ़ीं…

– सुधीर सिंह उजाला भोजपुरी फिल्म के उद्गम बिहार आ उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक भूमि से भइल बा. त अचरज ना होखे के चाहीं कि एकर बुनियाद बरकार राखे के जिम्मेदारीओ एही लोग का कान्ह पर टिकल बा. बाकिर पिछला दस साल से अपना कामयाबी पर इतरात भोजपुरी सिनेमा कापूरा पढ़ीं…

एक कहावत ह चमत्कार के नमस्कार! इहो कहल जाला कि चमत्कार रोज-रोज ना होले. अइसने एगो चमत्कार भइल रहे साल 2004 में जब ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ बनल. ओह समय भोजपुरी में फिलिम बनत रहली सँ बाकिर ओतना ना जतना आजु बनत बा. एगो नाम रहल मनोज तिवारी ‘मृदुल’के जिनकर लोकपूरा पढ़ीं…

कुलदीप श्रीवास्तव के लिखल हिन्दी किताब ‘भोजपुरी सिनेमा के पचास साल : २५ चर्चित फिल्में’ के विमोचन पिछला दिने दिल्ली के हिंदी भवन का सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हाथे भइल. एह किताब में भोजपुरी सिनेमा के पचास साल के सफ़रनामा पर चर्चा कइलपूरा पढ़ीं…

कुलदीप श्रीवास्तव के लिखल हिन्दी किताब ‘भोजपुरी सिनेमा के पचास साल : २५ चर्चित फिल्में’ के विमोचन पिछला दिने दिल्ली के हिंदी भवन का सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हाथे भइल. एह किताब में भोजपुरी सिनेमा के पचास साल के सफ़रनामा पर चर्चा कइलपूरा पढ़ीं…

आजु से पचास साल पहिले जब १६ फरवरी १९६१ पटना के शहीद स्मारक पर भोजपुरी के पहिलका फिलिम “गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो” के मुहुर्त भइल रहे आ अगिला दिने १७ फरवरी के एह फिल्म के शूटिंग शुरु भइल रहे तब केहू के अंदाज ना रहे कि भोजपुरी सिनेमा कहाँपूरा पढ़ीं…