एक दिन एगो फूल बेचे वाला आपन हजामत बनवावे सैलून गइल. हजामत का बाद पूछलसि, कतना पइसा ? हजाम जवाब दिहलसि, एको पइसा ना. एह हफ्ता हम समाजसेवा करत बानी. फूल वाला बहुत खुश भइल आ चल गइल. अगिला दिने जब हजाम आपन सैलून खोले चहुँपल त देखलस कि एगोपूरा पढ़ीं…

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भोला बाबू ओह दिन एगो बारात में शामिल रहलन. महफिल जमल त केहू नाचे वाली के इशारा कर दिहल आ ऊ नाचे वाली आके भोला बाबू के सामने बइठ गइल आ आपन गाना चालू रखलसि. गाना के बोल रहे, “कह देब हो राजा रात वाली बतिया”. भोला बाबू सकपका गइलें.पूरा पढ़ीं…

भोला बाबू खीसे फनफनाइल रहलें. पुछनी कि का बात हऽ त बिफर पड़लें. कहे लगले, नीतीश त हदे कर दिहलें. अइसनो कइल जाला ? लोकतंत्र के कमजोर कर के राख दिहलें, राहुल गाँधी के बेइज्जत कर दिहलें, आ लालू से पता ना कवना जनम के दुश्मनी निकाल लिहलें. कुछ देरपूरा पढ़ीं…

भोला बाबू बाजारे गइल रहलन. बाजार से गुजरत घरी उनका कान में एगो औरत आ एगो मरद के बात सुनाई दिहलसि. थोड़ देर रुक के ऊ सुने लगलन. मेहररुआ कहलसि – का हो आज ना लेबऽ का? जवाब में मरदा बोललसि – ना. तोर रोजे फाट जाता. आजु ले केपूरा पढ़ीं…