भोजपुरी के नेही-छोही लोगन खातिर मैथिली-भोजपुरी अकादमी के एगो नेवता.     Advertisements

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दिल्ली सरकार के मैथिली.भोजपुरी अकादमी 11 जनवरी का दिने दिल्‍ली के मंडी हाउस का फिक्‍की सभागार में गणतंत्र दिवस कवि सम्‍मेलन आयोजित कइलस जवना में दिल्ली आ बाहरो से आइल कवि लोग अपना कविता के पाठ कइल. उद्घाटन दिल्ली सरकार के कला संस्‍कृति एवं भाषा विभाग के सचिव का हाथेपूरा पढ़ीं…

– ओेमप्रकाश अमृतांशु कविता अइसन विद्या ह जेकर उमिर दस-बीस साल ना सैकड़ो-हजारो साल होखेेेेला. जेकरा के अनपढ़ो सुन सकेला, गुनगुना सकेला. कवि के कविता के भाव में दरद, आक्रोश, प्रेम आ ढ़ेरन अभिव्यक्ति के समावेश होखेेला. कविता में नदी के जइसन बहाव होखेेला. दू-चार-दस लाइन में आपन बात कहके,पूरा पढ़ीं…

– ओमप्रकाश अमृतांशु २१ फरवरी के दिने दुनिया अपना-अपना मातृभाषा के इयाद करेला. मातृभाषा माने माईभासा. माई के भाषा, माई के गोदी में खेलत-खात सीखल भासा, जवना में पहिला बेर माई के माई कहल सिखावल जाला. मातृभाषा का बारे में महाकवि रविन्द्रनाथ टैगोर के कहना रहल – हमनी के दूपूरा पढ़ीं…

– ओमप्रकाश अमृतांशु 10 अगस्त 2013 सांझ 5 बजे से श्रीराम भारतीय कला केन्द्र दिल्ली में कविता के भाव गूंजे लागल. कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य मे होखत रहे. ताली के गडगडाहट आ वाह-वाह करत, सुनेवाला लोगन के मुंह ना थाकत रहे. कविओ लोग जोश में कविता सुनावे से पाछापूरा पढ़ीं…

‍- सान्त्वना दिल्ली सरकार के मैथिली भोजपुरी अकादमी ३ नवंबर से ६ नवंबर ले रवीन्द्र भवन, मंढी हाउस, के कौस्तुभ सभागार में चार दिन के संगोष्ठी आयोजित कइलस. एह स्तरीय आ सार्थक आयोजन में शामिल भोजपुरि मैथिली साहित्य प्रेमियन आ साहित्यकारन के उछाह देखि के लागल कि अकादमी अपना पिछलापूरा पढ़ीं…