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दइब टेढ़ भइले करमवो बा फूटल : गजल

November 21, 2015 Editor 0

– रामयश अविकल चलीं ई सबुर के बन्हल-बान्ह टूटल कमाये बदे आज घर-गाँव छूटल। मिलल मार गारी, मजूरी का बदला सरेआम अब आबरू जाय लूटल। […]

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