डायरी   – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल   आज का पीढ़ी में भोजपुरी खातिर अनुराग देखिके बहुत नीक लागता। बाकिर, सोशल साइट पर गइला पर तब मन बहुत दुखी होला, जब लागेला कि भोजपुरी के लेके कुछ अइसन गिरोह बन गइल बाड़े सन, जेकरा भाषा में शिष्टता दूर-दूर तक नापूरा पढ़ीं…

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– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बोले खातिर बोलल जब से नोकरी के शुरुआत भइल तबे से देखत आ रहल बानी. आजु तक एहमें कवनो कमी नइखे आइल, बढ़ंतिए भइल बा. जरूरत खातिर बोलेवाला कम मिलले. लोग बूझसु कि हमहूँ बोलींले, अइसने लोग ढेर लउकले. जब-जब जाएके परेला सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविरपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल हिंदी लीखे में पानी छूटेला हमरा भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ? पग पग पर गूगल के सरन लिहींला कवनो भाषा से अनुवाद करींला भलहीं पेपर के कोश्चन बूझे ना केहू समझा-समझा के लिखवावत बानी भाई. बचने ना लिंगो पर आफति आई हाथी आ दहियो केपूरा पढ़ीं…

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी   चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि भाई ‘मोर’ का जगहा ‘और’ कहलो पर त कुछ बिगड़ी ना. फेर काहें एकर ओकालत करतारे लोग. हर भाषा में लिखे-पढ़ेवाला लोग विदेशी शब्दन कापूरा पढ़ीं…

मान  बढ़ाईं  जा माटी के    रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया  पन्ना  पलटल जाई  भारत माँ के  लोर के ?   तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब  ह  भारत  के  भाषा अपना जगह  सभे  कंचन बा  एको  ना  बाटे  काँसा हिन्दू  मुस्लिम  सिक्ख  ईसाई पूरा पढ़ीं…

            डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी जरूरी बा भोजपुरी के स्वाभिमान से जोड़ल       ओइसे त बहुत पहिले से संविधान का आठवी अनुसूची में भोजपुरी के डलवावे के माङ भोजपुरिया करत बाड़न बाकिर एने दु-एक बरिस से त जइसे बाढ़ि आ गइल बा. बहुत लोगपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल   जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार   जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन   जिम्मेदारी तलवार के धार मित्रन के दुतरफा वार आदर्श विचारपूरा पढ़ीं…

भोजपुरिका का ओर से जिउतिया (जीवित्पुत्रिका) के बहुत-बहुत शुभकामना. कवनो देश हमरा भारत पर आँखि उठाके देखे से पहिले एक बेरि जरूर सोचि लेव कि छल आ धोखा ओकरा कामे ढेर दिन ना आई. हमनी के माई जवन ओठघन खियवले बिया आ बरियार का सामने संकल्प लेके जवन खर जिउतिया कइलेपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल (-अबकी 23 सितंबर 2016 के जिउतिया व्रत पड़ल बा. एह मौका पर पहिले से प्रकाशित आलेख कुछ नया चित्र का साथे दुबारा दिहल जात बा. एह चित्रन का साथे विमल जी लिखले बानी कि एह तरह के लेखन आ सामग्रियन के जुटावे आ प्रदर्शित करे के पीछेपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल भादो महीना के अन्हरिया के चौथ के बहुरा कहल जाला.कहीं-कहीं एकरा के गाइ माई के पूजा के परब मानल जाला.गाइ आपन दूध पियाके आदिमी के पालेले आ पोसेले,हमनियो के कृतज्ञ होके गाइ के  सम्मान करेके चाहीं, पूजेके चाहीं.ओइसे, हम एकरा के सत्य आउर धर्म कापूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल सावन के पुरनवासी के इंतजार हर घर के होला काहेंकि एह दिन देश भर में राखी के तेवहार मनावल जाला. राखी माने रक्षाबंधन. ई हिंदू धर्म के लोकप्रियता के कमाल हटे कि रक्षाबंधन के तेवहार के विस्तार हिंदू धर्म से भाई-बहिन के धरम तक होपूरा पढ़ीं…