(भोजपुरी ग़जल) – सुधीर श्रीवास्तव “नीरज” जहां मे लौटि आइल जा रहल बा बचल करजा चुकावल जा रहल बा। हवस दौलत के कइसन ई समाइल सगे रिश्ता मेटावल जा रहल बा। लगल ई रोग चाहत के जिगर में खुद के पल पल सतावल जा रहल बा। गलत का ह..ई खुदपूरा पढ़ीं…

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(भोजपुरी कहानी) – सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ राति अबहिन दुइयो घरी नाहीं बीतल होई बाकिर बरखा आ अन्हरिया क मारे अधराति के लखां सन्नाटा पसरि गइल रहे चारू ओर. अषाढ के बादर पूरा दल बल के साथे आ के डटि गईल रहे… आ बरखा कहे कि आजु नाहीं बरसबि, फेर कबपूरा पढ़ीं…