– आलोक पुराणिक ई सीन सन् 2508 मतलब कि करीब पांच सौ बरीस बाद के ह. स्पांसरमय सब जग जानी, करहु प्रणाम….. – के वचनोच्चार का बाद संत जालीदास रामकथा कहे के तैयारी शुरु कर दिहले बाड़न. स्पांसर जुटावल जा रहल बा. जालीदास के मार्केटिंग मैनेजर अपना एक्शन के ईपूरा पढ़ीं…

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