डॉ. हरेश्वर राय सियासी छेनी से कालिमा तरासल बिया I चांदनी हमरा घर से निकासल बिया II भोर के आँख आदित डूबल बा धुंध में I साँझ बेवा के मांग जस उदासल बिया II सुरसरी के बेदना बढ़ल बा सौ गुना I नीर क्षीर खाति माछरि भुखासल बिया II कोंपलनपूरा पढ़ीं…

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– डॉ. हरेश्वर राय हमार सान ह हमार पहचान ह भोजपुरी, हमार मतारी ह हमार जान ह भोजपुरी। इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे ह सोखा, इहे सिवान ह, हमार सुरुज ह हमार चान ह भोजपुरी। बचपन बुढ़ापा ह, इहे जवानी चूल्हा के आगि ह, अदहन के पानी, हमारपूरा पढ़ीं…