– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बड़की बलिहार आ नदिया के पार आजुए रामेंद्र के फोन आइल रहल हा कि बड़की बलिहार गइल रहलीं हा. नाँव सुनते ‘नदिया के पार’ फिल्म के याद आ गइल. एह सुपरहिट फिल्म के कहानी ओही गाँव के हटे. लोग कहेला कि एकदम साँच. केशव प्रसादपूरा पढ़ीं…

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– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में थउस जाला, बाकिर तवना खातिर तहरा मने ना कवनो मोह ना माया। के जाने कवन कुमुर्खी तहरा घेरले बा किपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में गुजरल । भोजपुरी बोली-बानी से हमरा भाषा के संस्कार मिलल, हँसल-बोलल आ रोवल-गावल आइल। ऊ समझ आ दीठि मिलल, जवना से हम अपना गँवई लोकपूरा पढ़ीं…

– डा0 प्रकाश उदय केहू दिवंगत हो जाला त आमतौर पर कहल जाला कि भगवान उनुका आत्मा के शांति देसु। हमार एगो कवि-मित्र कहेले कि बाकी लोग के त पता ना, बाकिर कवनो रचनाकार खातिर अइसन बात ना कहे के चाहीं। शान्त आत्मा से कवनो रचना त हो ना पाईपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के जुबली स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ आ गरम लिट्टी अंजना सिह के जोड़ी के फिलिम – जिगर – अबकी का ईद का मौका प 23 जून के रिलीज होखे वाली बिया. संजोग बा कि एही दिने सलमानो खान के फिलिम टयूबलाइट के रिलीज होखल पहिले से तय बा.पूरा पढ़ीं…

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कवनो व्यक्ति,समाज,देश भा राष्ट्र के बनावे-जनावे के जबरदस्त जरिआ होले ओकर आपन भाषा. ओकर आपन मातृभाषा आ राज/राष्ट्रभाषा. दुनिया के आन देश ओकरा संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान वगैरह के ओकरे भाषा के जरिए जान-समझ के मान-सम्मान देला. आज जहाँ आउर देश अपना भाषा के माध्यमपूरा पढ़ीं…

– मुकेश यादव ‘ये बीबीसी लंदन है’ के आवाज जब साझ के साढे सात बजे रेडियो पर गुजेला, त लगभग 2 करोङ हिन्दुस्तानी रेडियो से चिपक के बइठ जालन, काहे से कि समय होला कार्यक्रम “दिनभर के”. बाकिर अब रेडियो पर ई आवाज हमेशा हमेशा खातिर बन्द होखे जा रहलपूरा पढ़ीं…

– मुकेश यादव ‘ये बीबीसी लंदन है’ के आवाज जब साझ के साढे सात बजे रेडियो पर गुजेला, त लगभग 2 करोङ हिन्दुस्तानी रेडियो से चिपक के बइठ जालन, काहे से कि समय होला कार्यक्रम “दिनभर के”. बाकिर अब रेडियो पर ई आवाज हमेशा हमेशा खातिर बन्द होखे जा रहलपूरा पढ़ीं…