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नीक-जबून- 4

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी   चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि […]

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नीक-जबून- 3

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी दीया-दियरी के दिन बहुरल तीन-चार दिन पहिले कपड़ा-ओपड़ा कीने खातिर निकलल रहीं जा. प्लेटफॉर्म प चढ़ते जवन लउकल, ओसे […]

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नीमिया रे करूवाइन

July 8, 2010 OmPrakash Singh 2

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन […]

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भोजपुरी प्रकाशकन के मजबूरी

June 23, 2010 OmPrakash Singh 2

अँजोरिया के एगो साहित्यकार आ सम्मानित पाठक दिवाकर मणि जी के एगो टिप्पणी मिलल बा हमरा खातिर “भोजपुरी सिनेमा” के मतलब होला “टोटल बकवास”। हिन्दी […]

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टटका खबर, बुध, २ जून

June 2, 2010 OmPrakash Singh 0

झारखण्ड में राष्ट्रपति शासन लागू शिबू सोरेन का आन्दोलन से जनमल झारखण्ड के सबसे बड़ समस्या खुद शिबू सोरेन बन गइल बाड़े. उनका बिना कवनो […]

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भूत बा कहाँ

May 20, 2010 OmPrakash Singh 1

– डा॰ सुभाष राय जाड़ा जब हाड़ ठिठुरावे लागेला त सगरो गाँवन में कउड़ा के बहार आ जाले. दुवारे से थोरिक लम्मे घर भर क […]

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चिट्ठी

March 31, 2010 OmPrakash Singh 0

– डा॰अशोक द्विवेदी हम तोहके कइसे लिखीं? कइसे लिखीं कि बहुते खुश बानी इहाँ हम होके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेला इहवों […]