लघुकथा संग्रह थाती

एह संग्रह में पचपन गो लघुकथा बाड़ी स. सगरी संग्रह एक एक क के प्रकाशित कइल जाई.

भगवती प्रसाद द्विवेदी

न्यूट्रान बम

मुखिया जी अपना दुआर पर हुक्का गुड़गुड़ावत अखबार बाँचत रहले. एक ब एक उन्हुकर निगाह एगो खबर पर जा के अँटकि गइल आ ऊ बगल में बईठल समहुत चउधररी के झकझोरलें, 'समहुत भाई, अब त ई बिदेसी वैज्ञानिकओ गजबे जुलुम करे जा रहल बाड़े स!'

'ऊ का मुखिया जी? कवनो खास खबर छपल बा का?'समहुत चउधरी मुँह बा के सवाल कइले

'हँ भाई! उहाँ के वैज्ञानिक लोग एगो बम बना रहल बा न्यूट्रान बम! ई बम जहवाँ गिरी उहवां के घर दुआर त सही सलामत बाँचि जइहें स, बाकिर जीयत परानी जरी सोरी साफ हो जइहें.' मुखियाजी असलियत बतवले.

'बाप रे, अइसन जादू!' समहुत चिहुँकले.

'हँ हो! बाकिर जब आदमिए ना रही त इ चीज बतुस आ घर दुआर रहिए के का करी!'मुखिया जी हुक्का एक ओरि ध दिहले.

'बाकिर मुखिया जी, ई त कवनो नयका बाति नइखे बुझात. अइसन बम त इहवाँ पहिलहीं से बनल शुरु हो गइल बा.' समहुत चउधरी कुछ सोचत कहले.

'का बकत बाड़ऽ समहुत भाई! न्यूट्रान बम आ अपना देस में?'मुखिया जी अचरज से पुछलन.

'ठीके कहत बानी मुखिया जी! चिहाईं मति! अपना देस में पढ़ाई के एगो अइसने न्यूट्रान बम छोड़ाइल बा. तबे नूँ जब आदमी पढ़ि लिखि जात बा, तब ऊ बहरी से ओइसे के ओइसहीं रहत बा, बाकिर ओकरा भीतरी के आदमीयत मरि जात बा. आ जब आदमीयते ना रही, त आदमी ससुरा रहिए के का करी!' मुखिया जी अबहुँओ समहुत का ओरि टुकुर टुकुर ताकत रहले.


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