भोजपुरी साहित्य के गौरव आ एगो मजबूत पाया जगन्नाथ जी काल्हु शनिचर 14 मार्च 2020 के साँझि खा साढ़े चार बजे पटना के अपना साधनापुरी निवास पर आपन आँखि मूदि लिहलीं. भोजपुरी गजल में जगन्नाथ जी के बड़हन योगदान का चलते उनुका के भोजपुरी के गालिब नाँव से जानल जाएपूरा पढ़ीं…

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कुमार अभिनीत ‘भोजपुरी संगम’ के 121वीं ‘बइठकी’ अतवार का दिने गोरखपुर में तुर्कमानपुर का लगे साहित्यकार डॉ. रवीन्द्र श्रीवास्तव ‘जुगानी’ जी के घरे भइल. एह ‘बइठकी’ के पहिलका दौर में डॉ. फूलचन्द प्रसाद गुप्त आपन लिखल भोजपुरी कहानी पाठ कइनी. एह कहानी के समीक्षा करत प्रो. आर डी राय कहलेंपूरा पढ़ीं…

आजु ढेर दिन बाद अपना भोजपुरी अन्तरताना अँजोरिया पर आवे के मौका मिलल त कुछ खुशी मिलल. बाकिर साथही अफसोसो भइल कि भोजपुरी साहित्य के थाती के एगो बड़हन हिस्सा अपना अँचरा में समेटले आ भोजपुरी में पहिलका अन्तरताना होखे के सौभाग्य पवले अँजोरिया के हालत आह बुढ़िया माई जइसनपूरा पढ़ीं…

समाज, संस्कृति आउर सभ्यतन के बनावे आ जोगावे में महिला लोगन के योगदान हमेसा से रहल बा. बात भाषा के होखे भा संस्कृति के, महिला लोग एकरा हमेसा से भरले-पूरले बा. महिला लोगन के योगदान हर भाषा, सभ्यता आउर संस्कृति में रहल बा. महिला लोगन के एही योगदान के बटोरेपूरा पढ़ीं…

डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़ माध्यम रहे। बैरन, पोस्टकार्ड, अन्तर्देशी आ लिफाफा में लोग नेह-छोह, प्रेम-विरह, चिन्ता-फिकिर, दशा-दिशा आ परिस्थिति-परिवेश पर अपना हिरदया के उद्गार लिखि के भेजे । कबो-कबो त ‘पाती’ जेतना लिखनिहार का लोर से ना भींजे,पूरा पढ़ीं…

रामरक्षा मिश्र विमल भोजपुरी दू डेग आगे त हिंदी दू डेग पाछे हिंदी के कुछ तथाकथित विद्वान एह घरी भोजपुरी पर आपन-आपन ब्रह्मास्त्र चलावे में लागल बा लोग. ऊहन लोग में ई डर समा गइल बा कि भोजपुरी के जहाँ संविधान का आठवीं सूची में जगह मिलल कि हिंदी सतनासपूरा पढ़ीं…

नई दिल्ली में साहित्य अकादेमी का सभागार रवीन्द्र भवन में भोजपुरी के मशहूर लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी के लिखल आलोचना के किताब के विमोचन पुरनिया लिखनिहार आ साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष रह चुकल आचार्य विश्वनाथ तिवारी जी का हाथे कइल गइल. एह मौका पर भइल बतकही में मशहूर कथाकारनी डॉपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के मशहूर आ प्रतिष्ठित लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी जी के लिखल किताब “भोजपुरी रचना आ आलोचना” के विमोचन 29 अक्टूबर 2019, मंगल का दिने दिल्ली में साहित्य अकादेमी के सभागार में होखे जा रहल बा. फिरोजशाह मार्ग पर बनल रवीन्द्र भवन के एह सभागार के तीसरा माला पर मौजूदपूरा पढ़ीं…

दू दिन पहिले विमल जी के पत्रिका सँझवत के जानकारी आ सामग्री मिलल. एने कई एक महीना से हम थाकल महसूसत बानी जवना चलते अब अँजोरिया भा एकरा दोसरा साईटन पर नया सामग्री नइखीं दे पावत. थाकल मन एहू चलते बा कि भोजपुरी में लंगड़ी गईया के अलगे बथान केपूरा पढ़ीं…

दिनेश पाण्डेय उहाँ का सँगहीं रहनीं। बइठार रहे त चलीं सउदा-सुलुफ का सँगे कुछ मटरगस्तियो हो जाई, एक पंथ दुइ काज। तय भइल जे किराना बाजार मुँहें चलल जाई, फेरू सब्जीहाट होते हुए लवटि आवल जाई। अब दु अदिमी सँगे चले आ चुप रहे भा एगो बोलते जाय आ दोसरकापूरा पढ़ीं…

डॉ अशोक द्विवेदी ‘कबीर कूता राम का/मुतिया मेरा नाउँ। गले राम की जेंवड़ी/जित खैंचे, तित जाउँ।।’ कबीर उत्तर भारत के अइसन फक्कड़ मौला सन्त रहलन, जे अपना सहज लोकचर्या आ ठेठ बोली-भाषा के कारन सबसे अलग पहिचान बनवलन। उनका कविता में ‘अनुभूत सत्य’ का प्रेम पगल भक्ति के अलावा अगरपूरा पढ़ीं…