ई सरकार का हऽ

by | Jan 16, 2011 | 0 comments

– जयंती पांडेय

रामचेला एह जाड़ में सबेरे-सबेरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पहुँचले. बाबा घूरा तर बइठल रहले. संगे अउरो दू चार गो लोग रहे. बाबा के दंडवत बोल के राम चेला घूरा के लगे एगो पुअरा के बिड़ई पर बइठ गइले. राम निहोरा खइनी मलत रहले, बनवला के बाद सबके दे के रामोचेला की ओर बढ़वले. चुटकी में सुर्ती दाबि के राम चेला बाबा से कहले, बाबा हो. सरकार के बारे में तोहार का खेयाल बा ?

बाबा कहले, देखऽ बाबू. दर्शनशास्त्र के मोताबिक ई संसार पानी के बुजबुजी हऽ. अबे खिलल बा अबे बिला जाई. सरकारो पर इहे नियम लागू होला. अभी सरकार चल रहल बा अबे सुनाई कि गइलॆ लेकिन ई त प्रकृति के नियम हऽ. सरकार एगो अइसन चीज हऽ कि एकर व्याख्या एगो नियम से ना हो सकेला. एकर गणित अलग होला, साइंस अलग होला, बायलाजी अलग होला. अब जीव विज्ञान के आधार पर देखबऽ त पता चली कि सरकार घुसकत बिया, कबहु ड़ेंगऽतिया, त कबहुं चलऽतिया. सरकार के पीठ में रीढ़ ना होला. एही से ऊ जब ना तब झुक जाले. कवनो बात पर डाँड़ टेढ़ क ले ले आ कवनो ना कवनो सहारा ले के खड़ा रहेले. लेकिन जे सहारा देले ऊ चुप ना रहे. कबो चिउंटी काटेला, कबे धकियावेला त कबो छोड़ देबे के धमकी देला. कब्बो इहो देखल जाला कि सहारा देवे वाला हटि गइल. सरकार लागल डगमगाये. लेकिन ओही समय जइसे प्रभु के चमत्कार होला ओसहीं ना जाने कवन गड़बड़ घोटाला होला कि कवनो इयोर से केहू आ के सरकार के सहारा दे देला. एगो बयान जारी हो जाला कि सरकार गिरी ना, एकदम खतरा से बाहर बा. जवन दल सरकार के सहारा देला ओकर मन आ सरकार के मन में बड़ा अंतर होला, तबहुओं ऊ सहारा देला. ई त भइल जीव विज्ञान के बात. अब सरकार के देखीं जरा गणित के नजरिया से. एह पर ऊ फार्मूला ना लागे जे सारी दुनिया में लागू होला. उहां समर्थन के गणित, जोड़-तोड़ के फार्मूला, खरीद-बिक्री, पद के बँटवारा वगैरह जियादा काम आवेला. केमिस्ट्री त हमेशा बदलत रहेले. कबहुं सरकार के साथ हो जाले त कबहुं सरकार के खिलाफ. भीषण इलाज से सरकार के हालत हमेशा अंतिम साँस गिन रहल बुढ़िया अस होला. अब मुअल तब मुअल. लेकिन सहारा समर्थन नामक कोरामिन से बाँचल रहेले.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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