नेता बने के आइडिया तियाग दिहले रामचेला

by | Jun 1, 2011 | 0 comments

– जयंती पांडेय

जबसे पाँच राज्यन में चुनाव भइल तबसे रामचेला बड़ा मायूस हो गइले. मुँह सुथनी अस बना लिहले आ चेहरा ओल अस लटका लिहले. बाबा लस्टमानंद के बड़ा माया लागल. लगे जा के पूछले का, हो रामचेला ! बड़ा उदास लागत बाड़ऽ ?

ऊ बोलले, जान जा बाबा तहरा से कहऽतानी, अब हम अपना कवनो आइडिया पर काम ना करब, एक रिटायर ले लेब.

बाबा चउँकले, अरे रिटायर लेबे के कवन बाति बा, तूं नोकरिये कब कइल ?

रामचेला गरमा गइले. कहले, बाबा सोच समुझ के बोलऽ. आइडिया सोचल आ ओह पर काम कइल का काम ना हऽ ? अब हम ओहू पर ना करेब.

बाबा पूछले, कवन आइडिया रहे हो ?

सोचत रहीं कि नेता बनि जाईं आ बाकी जिनिगी चैन से काट लेब. लेकिन चुनाव के नतीजा देख के सब कुछ तियाग देबे के मन करत बा.

अरे भाई, राजनीति में त हारल जीतल चलत रहेला. एहमें मायूस ना होखे के चाहीं. आ मैदान में कतना बूढ़ बूढ़ नेता लोग जमल बा त ऊ लोग के कवनो फिकिर नइखे. आ तूं त ऊ लोग से नया बाड़ऽ. तनिय मुड़िया में के बार पाकल बा आ बाकी जवन बार बा से पाके खातिर लालायित बा आ तहरा में कवन कमी बा.

रामचेला उदास हो गइले, बाबा तहरा में इहे एगो कमी बा. तूं हमेसा गलत समय पर गलत बात बोलेलऽ. इहाँ बाति नया जवान आ बूढ़ के नइखे. बात बा जनता के. ई जे जनता बिया नू, ओकर कवन ठेकाना. दक्खिन में देखऽ करुणा चाचा के का हाल हो गइल. अपने त हरबे कइले, बेटिओ के जेल जाये के पड़ल. बंगाल में बुद्धदेव बाबा के हाल देखिये लिहलऽ. अब का बाकी बा ? ऊ लोग के सब कइल धइल चउपट हो गइल.

बाबा कहले, खाली ओही लोग के उदाहरण देतारऽ. आ आसाम में देखते नइखऽ कि तरुण भइवा तिसरका बेर चहुँपल बा.

रामचेला कहले, उनुकर नाम मत लऽ, ऊ त दिन के दिन ना बुझले आ रात के रात ना. ऊ त उहवां के जनता खातिर बड़ा काम कइले बा.

बाबा कहले, त जा. तुहूं जा के काम करीहऽ.

का कहलऽ बाबा ? ई उमिर में हम काम करब. सोचनी कि नेता ब जायेब आ पइसा आ पावर रही. तनी ऐश क लेब, विदेश घुमि लेब. लेकिन ई सब सपना खतम हो गइल. बुझाता कि भगवान बे बिदेश गइले हमरा के उठा लीहें.

बाबा जानत रहले कि आजु रामचेला के तोख नइखे दिहल जा सकत से चुप रहि गइले.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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