बतकुच्चन – ३६

by | Dec 7, 2011 | 1 comment


पिछला बेर बँड़ेरी के चरचा पर बात खतम भइल रहे. बँड़ेरी ओह लकड़ी के बीम के कहल जाला जवन कवनो छान्हि भा पलानी के बीच से थमले रहेला आ ओकर दुनु सिरा दुनु तरफ खँभा भा दिवार पर टिकावल रहेला. अब देखीं कि कइसे तनी मनी का हेर फेर से दू गो शब्द अइसन सामने आइल जवना के आपस में कवनो संबंध नइखे. कई बेर आपस में संबंध त रहेला बाकिर एक दोसरा से उलट. जइसे कि लुकाइल आ लउकल. दुनु के संबंध अंगरेजी के लुक से जुड़ल कहल जा सकेला. बाकिर अगरेजी आ भोजपुरी में कबो कवनो संबंध नइखे रहल, अंगरेजी के नियर आ भोजपुरी के नियरा का बावजूद. भोजपुरी में नियर के एक मतलब लेखो होला, समान, एक जइसन. जइसे कि दुनु चीज एके नियर लउकत रहल. उहे लउकल तनी मनी का बदलाव से लुकाइल हो जाला. लुकाइल, ऊ जे लउकत ना होखे. अब एह लुकाइल के कतनो लुकारी भाँजीं, ऊ लउकी ना. लुकारी के हिन्दी समानार्थी शब्द मशाल होला. लुकारी से लहोक निकलेला. होली का समय होलिका दहन वाला आग से लुकारी जरा के गाँव का बहरी दोसरा गाँव का सिवान में फेंके के परम्परा रहल बा. अब ई परंपरा कवनो लुहेड़ा बनवलसि कि लखेरा, ई सोचे के बाति बा. काहे कि एह लुकारी फेंके के मतलब इहे होला कि दोसरा के लुकारी देखावल जात बा, लहकावल जात बा, ललकारल जात बा. अब लुकाइल आ लउकल का फेर में लउकी याद आ गइल. कहे खातिर लउकी भा लौकी त सब्जी रहल आइल बाकिर एगो योग बाबा अपना योगमाया से एकरा के फल बना दिहलें आ लोग एह लउकी के रस बड़ा चाव से पिये लागल. हाल ई हो गइल कि लउकी सब्जी बाजार से त लुका गइल बाकिर फल बेचेवालन किहाँ लउके लागल. जबकि लउकी के रस पी के कई जने दुनिये से लुका गइले. सरकार के कहे के पड़ल कि लउकी के रस मत पीहीं सभे, खास कर के तब जब ऊ कड़ुआ लागे. बाकिर बाबा लोग के का ? अपने बेमार पड़ी लोग त सीधे अस्पताल के राह धरेला बाकिर अपना चेला चाटी के सगरी रोग योगे से दूर करे के दावा ना छोड़े. अब एहसे कवनो मतलब नइखे कि योग्य के बिगड़ल रुप जोग जोड़े वाला योग से मिल के जोगाड़ बनि जाला. कवनो समस्या से निकले के गैर परंपरागत साधन जोगाड़ कहल जाला आ जे एन केन प्रकारेण आपन काम बना लेव ओकरा के जोगाड़ू कहल जाला. आ अइसने जोगाड़ अकसरहाँ सरकार चलावे के कामे आवेला. सरकार त जोगाड़ भिड़ा के बना चला लिहल जाला बाकिर एह जोगाड़ू सरकार का चलते आम आदमी के जिनिगी के जोगाड़ जोगाड़ल मुश्किल बनि जाला.

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1 Comment

  1. चंदन कुमार मिश्र

    ई छत्तीसवाँ भाग त बरा बन्हिआ लागल। बहुत आच्छा। बहुत खुस भइनी अबकिर।

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