बतकुच्चन – ४१

by | Jan 2, 2012 | 1 comment


पिछला दिने खूब बतकही सुने के मिलल आ हम बतरस लेत रहनी. बाकिर बतकही का दौरान बाताबाती आ गलथेथीओ सुने के खूब मिलल. त सोचनी काहे ना आजु बाते पर बतकुच्चन कइल जाव. बतकुच्चन करे वाला जरूरी नइखे कि बतबनवो होखे. बतकुच्चन करे आ गलथेथी करे में बहुते फरक होला. हम बतकुच्चन जतना कर लीं गलथेथी ना करीं. एक त हम सांसद ना हईं कि हमरा गलथेथी भा गलथेथरई करे के खास अधिकार मिल गइल बा. हमरा एक एक बाति पूरा नाप तौल के कहे के पड़ेला. एक त ओह बाति के कवनो गलत मतलब ना निकले आ दोसरे ऊ कवनो तरह के खीसपित से अलगा होखे. आदमी के बाति का पाछा जब खीसपित आ जाला त बाति बेमतलब होखे लागेला. ओहमें आदमी अपना मन के क्षोभ निकाले लागेला. हम बतफरोशो ना हईं जे अपना बाति के बढ़ा चढ़ा के कहेला. हम त बस बतरसिया हईं जे बतराइल करेला, बतरौंहा कइल चाहेला. मकसद बस एके गो बा कि बतकूचना बतावल चाहेला कि हर शब्द का पाछा एगो मतलब होला. मतलब ना होखे त ऊ शब्द ना रहि के आवाजे भर रहि जाई. ई बाति भा बतिया केहु के नीक लागी केहू के बेजाँय. बाकिर बतिया के मतलब एगो दोसरो होला. एगो बाती दिया में जरेला आ एगो बतिया कवनो फल के छोटहन भा काँच शुरूआती रूप के कहल जाला. एह बीच हम बहुते शब्द नया परोस गइनी बिना ओकर चरचा कइले. बतबनवा आ बतकुच्चन के चरचा हो चुकल बा. आजु गलथेथी भा गलथेथरई के बाति कइल जाव. जब आदमी का लगे कहे के कुछ ना रहे तब ऊ खाली गाल बजावेला आ एही गाल बजवला के गलथेथी कहल जाला. गाल बजावल माने कि बिना मुद्दा पर अइले कुछ कहल. बस एह खातिर कि हमरा कुछ कहे के बा. अब गलथेथी संसद में भलही चल जाव एहिजा ना चलि पाई. एहिजा त हमरा मुद्दा पर रहे के पड़ी. कवनो पंचायत भा बइठक तबे सफल होला जब लोग बतकही करे बाताबाति ना. बतकही आ बतियावल में हालांकि कबो कबो तनी फरक पड़ जाला. बतकही सुनासुनीओ के कहल जाला. जब कवनो बाति पर बहसा बहसी होखे लागो तब ऊ बतियावल ना रहि जाव बतकही हो जाले. बतफरोश आ बुतफरोश में बस अतने फरक होला कि एगो बात बनावेला दोसरका बुत भा मूर्ति. आजु जब रउरा एकरा के पढ़त बानी त चारो ओर नया साल के जोश आ उमंग पसरल बा. सभे नया शुरूआत करे के योजना बनावत होई. बाकिर हमेशा याद राखीं, कवनो योजना के सफलता एही मे होला कि ओकरा के बतियावहीं भर खातिर ना राखल जाव बलुक ओकरा के अमली जामा पहिरावल जाव, ओह पर अमल कइल जाव. आशा करब कि रउरो सभे अपना नयका योजना पर अमल करब आ सफलता का राह पर आगा बढ़ब. हमरो बहुत बहुत शुभकामना बा रउआ खातिर.

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1 Comment

  1. प्रभाकर पाण्डेय

    गलथेथी भा गलथेथरई से इयाद आइल गाँव में खेल खेलत समय लोग खूब गलगोदई भी करे।
    …हर बेर की तरे राउर इ बतकुच्चन भी बात की बात में निकलि के बात के बतंगड़ बनवले बिना बतकुच्चन के सार्थक अउर तार्किक क देहलसि। धन्यवाद।

    पूरा अँजोरिया (परिवार, पाठक लोग, भोजपुरिया लोग) के नया साल के हार्दिक शुभकामना।

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