बतकुच्चन – १८

by | Jul 12, 2011 | 0 comments

पिछला पखवारा जब डीजल किरासन आ रसोई गैस के दाम बढ़ावल गइल त लागल कि बिछी डंक मार दिहले होखे. बिछी मरला के दरद के लहर जइसन एह महँगाईयो के लहर उठे लागल बा. आ बिछी के लहर से याद पड़ल कि बरखा का चलते सगरो बिछलहर हो गइल बा आ सम्हरि के चलला के जरूरत बा. बाकिर एह बिछ लहर के बिछी के लहर से कवनो नाता ना होला. आ एह बिछलहर से वइसन लहरो ना उठे. पिछला दिने हमरा बिछीओ का लहर से अधिका दरद तब लउकल रहे जब एगो कवि जी का कविता में संपादक का गलती से भा प्रेस का भूल से बीछे के पीछे हो गइल रहे आ कवि जी दरद का मारे तड़प उठल रहले. प्रेस में त अतना बड़ बड़ गलती के इतिहास बा कि दोहरावे बइठल जाव त ओराई ना. बाकिर बीछे वाली बाति हमरा के बहुत कुछ सोचवा दिहलसि. सोचे लगनी कि बीछे चुने भा हेरे में का फरक होला. बीछे वाली बाति अब बहुते कम सुने के मिलेला. अधिका लोग चुने से काम चला लेला. हालांकि हम ओह चूना के बाति नइखी करत जवना के खइनी, कहल त जाला खइनी बाकिर असल में होखेला थूकनी, में मिलावे के कामे आवेला. चुनल चुनाव का तरह होला, जवना में कवनो समूह भा ढेर में से बढ़ियका के चुनल जाला. केहू खरबका के ना चुने. अलग बाति बा कि ऊ बाद में बहुते खराब निकल जाव. जबकि बीछल दुतरफा होला. आ बीछल नीमन बाउर दुनु के जाला. बउरका में से निमनका के बीछल जाले आ बउरका में से नीमनका के. जइसे कि सड़ल आम का ढेर में से बढ़ियका आम बीछल भा आम का टोकरी में से सड़लका के बीछल. हेरल एह बीछल भा चुनल से अलग तरह के होला. हेरल हेराइल चीझु के खोजे के कहल जाला. जइसे केहू भूसा का ढेर में हेराइल सूई के खोजे भा माथ में से ढील हेरे. सूई का ढेर में से सूई के हेरल ना जाव, चुनल भा बीछल जा सकेला. अब बीछल, चुनल, आ हेरल के मतलब साफ हो गइल होखी. अब रउरा नेता लोग में ईमानदार के हेरल मत शुरु कर दीं. शायदे भेंटाई. काहे कि समय पर रउरा बीछली ना आ सही के चुननी ना.

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पर भेज दीं. सभकर नाम शामिल रही सूची में बाकिर सबले बड़का पाँच गो भामाशाहन के एहिजा पहिला पन्ना पर जगहा दीहल जाई.
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(1)
अनुपलब्ध
18 जून 2023
गुमनाम भाई जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

(3)

24 जून 2023 दयाशंकर तिवारी जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ एक रुपिया
(4)
18 जुलाई 2023
फ्रेंड्स कम्प्यूटर, बलिया
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया
(7)
19 नवम्बर 2023
पाती प्रकाशन का ओर से, आकांक्षा द्विवेदी, मुम्बई
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

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24 अप्रैल 2024
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सुतला मे, जगला में, चेत में, अचेत में। बारी, फुलवारी में, चँवर, कुरखेत में। घूमे जाला कतहीं लवटि आवे सँझिया, चोरवा के मन बसे ककड़ी के खेत में। - संगीत सुभाष के ह्वाट्सअप से


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