शहजादा आ शोहदा (बतकुच्चन – १३०)

by | Oct 16, 2013 | 0 comments


राजनीति में आवत गिरावट के कवनो पेंदी नइखे लउकत. चारा चबावे वाला के उमेद रहुवे कि ओकरा साथे भाईचारा निभावल जाई बाकिर ओकरा के बेचारा बना दिहल गइल. जे जब तब संकट का घरी में उनुकर साथ दिहलसि आ देत गइल ओकरा पर जब आफत आइल त तनाइलो छतरी उनकर बबुआ छीन ले गइल. बबुआ के एही हरकत ला देश का राजनीति में तेजी से उभरल नेता बबुआ के शहजादा कह के संबोधित कइलन. दोसरा तरफ से एह नयका नेता के सब कुछ कहल गइल बाकिर केहु शोहदा ना कहल. सोचे लगनी कि का बात बा? सगरी विशेषण से नवजला का बावजूद एह शोहदा वाला विशेषण से ओकरा के काहे नइखे नवाजल जात. का एह लोग के शब्द भंडार में कमी बा कि कुछ दोसर बात बा. पता चलल कि शोहदा से डर बा कि कहीं उनकर वोट बैंक मत बिदक जाव काहे कि शोहदा उर्दू के शब्द ह आ उर्दू वाला बुर्का पर भड़के वाला गोल शोहदा शब्द के इस्तेमाल कइसे कर लेव. अब एह शोहदन का चलते भलहीं भयंकर दंगा हो जाव, देश भर में तनाव पैदा हो जाव बाकिर शोहदन का खिलाफ कवनो एक्शन लेबे से पहिले पुलिस के पचास ना हजार बेर सोचे के पड़त बा. का पता कब कवन नेता ओह शोहदा के तरफदारी करे उतर जाव. याद बा नू मुजफ्फरनगर वाला दंगा के जड़ में इहे शोहदा रहुवे. लड़िकी से छेड़छाड़ एह शोहदन के रोजमर्रा के काम हो गइल बा बाकिर पुलिस एह शोहदई के अपराधे माने के तइयार ना होखे से कवनो शिकायते दर्ज ना करे. बाद में उहे हाल हो जाला कि सर्दी के इलाज ना जाने वाला डाकटर तबले इंतजार करेला जब ले मरीज के निमोनिया ना हो जाव. काहे कि सर्दी के इलाज ओकरा लगे नइखे बाकिर निमोनिया के इलाज त बा. खैर बात निकलल रहुवे शहजादा आ शोहदा के त चलीं फेर ओही पर लवटल जाव. शहजादा आ शोहदा में बहुत फरक ना होखे. फरक बस जनम के होला. शहजादा शाह का घरे जनमेला जबकि शोहदा आम आदमी का घरे. बेलगाम दुनु होले बाकिर शहजादा का पीछे शाह के पूरा प्रशासन जी हुजूरी करे खाड़ रहेला जबकि शोहदा के हर काम अपने भरोसे करे के पड़ेला. दुनु के काम का पीछे कवनो तर्क ना खोजल जा सके. बस मन में पिनक चढ़ल आ कुछ कमाल देखा दिहलन. ई ना सोचलन कि जवन करे जात बाड़े तवना के असर का होखे वाला बा. शहजादा के भाषा तनी नफीस होखे के चाहेला शोहदन जइसन लंठ वाला ना. फाड़ देब, चीर देब, फेंक देब जइसन. खराब से खराब बात नफासत से कहल जा सकेला कि कामो हो जाव आ केहू के खराबो ना लागे. बाकिर शहजादा के ई बात बतावे के? सभे त ओकरा वाहवाही में लागल बा. जो तुमको है पसंद वही बात कहेगे, तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे. बाकिर भुला जात बा लोग कि शहजादा शोहदा बनत बनत बनी, शोहदा त शोहदे रहल बा ओकरा बने के नइखे. ऊ त सीधे आम लोग से जुड़ल आम लोग के भाषा बोलत बा. शोहदा के शोहदई सामने वाला के भलही खराब लाग जाव शोहदा के पीछे चलत लोग त शोहदा के अंदाज के कायल हो गइल बा, ओकर दीवाना बन गइल बा. आ अपने बतकुच्चन में आजु हमहूं अझुरा के रह गइल बानी कि कवना शोहदा के तरफदारी कर दिहनी हम. गाँव जवार पड़ोसी के लड़िकी के छेड़े वाला शोहदा के कि सत्ता सुंदरी के घेरियाए वाला शोहदा के. कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय……

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(1)
अनुपलब्ध
18 जून 2023
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सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

(3)

24 जून 2023 दयाशंकर तिवारी जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ एक रुपिया
(4)
18 जुलाई 2023
फ्रेंड्स कम्प्यूटर, बलिया
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया
(7)
19 नवम्बर 2023
पाती प्रकाशन का ओर से, आकांक्षा द्विवेदी, मुम्बई
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

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