सेकूलरिज्म अप्रासंगिक हो गइल बा

by | Jun 26, 2011 | 0 comments

– पाण्डेय हरिराम


भारत का इतिहास में तुर्की के भूमिका बहुते खास रहल बा. तुर्किये का चलते भारत के बँटवारा भइल लेकिन आगा चले के सेकूलरिज्म के बुनियादो पड़ल. पहिला विश्वयुद्ध में जब तुर्की के सुलतान हार गइले त उनुका खिलाफत पर खतरा आ गइल. चारो तरफ हवा फइल गइल कि ब्रिटिश हुकूमत येरुशलम के मुफ्ती के खलीफा के गद्दी सँउपल चाहत बिया. मुस्लिम दुनिया में एहसे बहुते नाराजगी रहे. महात्मा गांधी के बुझाइल कि ब्रिटिश हुकूमत का खिलाफ भारत में हिंदु मुसलमानन के एकजोड़ आंदोलन करे के ई एगो बढिय़ा मौका बा आ ऊ तुर्की के खलीफा का समर्थन में खड़ा हो गइले. ओकरा बाद भारत में बड़हन खिलाफत आंदोलन शुरू हो गइ. तब तकेले के ई देश के सबले बड़ आन्दोलन रहे, इहाँ तकले कि 1857 के सिपाही विद्रोहो ले बड़. चौरा चौरी कांड का बाद गांधी जी एह आंदोलन के वापस ले लिहलन. ई बाति मोहम्मद अली जिन्ना के बड़ा नागवार लागल आ ऊ गांधी जी से मांग कइलन कि मोती लाल नेहरू के प्रतिवेदन में मुसलमानन के अधिकारन के गारंटी शामिल होखे के चाहीं. गांधी जी उनुकर बात ना मनलन आ जिन्ना खिसिया के विदेश चल गइलन. 6 साल ले ऊ लंदन में रहके बैरिस्टरी कइलन आ जब भारत लवटलन त मुसलमान अधिकार के गारंटी के बात मुसलमानन खातिर अलग देश के माँग में बदल गइल. इहे मांग आगा चल के देश के बँटवारा के आधार बन गइल.

साल 1923 में जब कमाल अतातुर्क तुर्की का गद्दी पर अइलन त ऊ मजहब केर राजकाज से अलगा कर दिहलन. ऊ अपना राजनीति के आधार सेकूलरिज्म के बना लिहलन. हालांकि उनुकर सेकूलरिज्म अल्पसंख्यकन के मजहब के हिफाजत कइल भा सगरी मजहबन के एक निगाह से देखल ना रहल. उनुकर सेकूलरिज्म मानवतावादी रहल. कमला अतातुर्क के मानना रहे कि मजहब तुर्की के पिछड़ल बना के राख दी. मजहब आधुनिकता के विरोध करेला ओकरा उलट होला. एहसे संविधान के रक्षा के जिम्मेदारी ऊ सेना के सँउप दिहल. अब अस्सी साल का बाद एगो नया मजहबी पार्टी ए के पी(न्याय अउर विकास पार्टी) तुर्की के सत्ता सम्हरलसि. ई पार्टी इस्लामी जरूर हवे बाकिर इस्लामपंथी ना ह. ई विकास के आपन लक्ष्य बनवले बिया. लिहाजा ओहिजा के फौज के ई बहुते अजीब लागत बा ऊ एक तरह से पुरातनपंथी साबित होत जात बिया. ओहिजा अब सेकूलरिज्म प्रासंगिक नइखे रहि गइल. ओहिजा चुनौती आधुनिकीकरण के बा. ऊ खिलाफत के लागू करावे भा तुर्की के प्राचीन मजहबी शान वापिस ले आवे जइसन बाति नइखे करत.

भारत में लगभग सगरी दल अपना के सेकुलर कहेले. लेकिन हमनी का देश में कुछ दल, जवना में भाजपो शामिल बिया, पुरनका जमाना के सपना देखावे से बाज ना आवऽ सँ आ ओकनी के छोड़ियो दिहल जाव त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कइसे महटिया दिहल जाव. भारत में सेकूलरिज्म दकियानूसी के एगो तंत्र बन गइल बा आ एही चलते कांग्रेस पार्टीओ मुसलमान हित के हिफाजत करे का जगहा ओह लोग के अपना वोटबैंक का रूप में देखत बिया. जवाहर लाल नेहरू आ सुभाष चंद्र बोस सही मायना में सेकुलर रहले. ऊ लोग राजनीति में मजहब के हर रूप के विरोध कइल. आजु सेकूलरिज्म के मतलब हो गइल बा कि हिंदू नेता इस्लामी टोपी पहिर के इफ्तार पार्टियन में शामिल होखसु आ टीका लगा के हर तरह के बाबा लोग के गोड़ छूअसु. अपना बेवहार में ई लोग आधुनिकता के बिसार दिहले बा. एक तरफ त विज्ञान के बाति करी लोग त दोसरा तरफ मंत्री बनला पर सही मुहुर्त में शपथ लेबे खातिर पतरा पँचाग देखवाई लोग. आजु जरूरत बा कि राजनीतिक दल हिंदू आ मुसलमान के खांचा में वोटरन के राखल बन्द करसु आ सबका के भारतीय समुझस. सेकूलरिज्म आजु का जमाना में अप्रासंगिक हो गइल बा आ सरकार के एह बाति पर गंभीरता से मनन करे के चाहीं आ विकास की दिशा के ओह तरफ मोड़े के चाहीं.


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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