Month: अगस्त 2015

भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन : एगो ना भुलाए जोग यात्रा

– डाॅ. अशोक द्विवेदी काल्हु भोरे क निकलल रात एक बजे घरे पहुंचनी. ए साल के सावन में बलिया बनारस ढेर इयाद आइल बाकि महाराष्ट् में भीमा श॔कर ज्योतिर्लिंग के…

विश्वगुरु भारत आ मैकाले के शिक्षा नीति

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ मैकाले शिक्षा पद्धति से अरजल शिक्षा में अफीमो से ज्यादे नशा बा. जवना के अरजते मनई के मन-मिजाज अइसन बउराला-पगलाला कि ओकरा भारतीय सभ्यता-संस्कृति, भाषा-शिक्षा,…

भोजपुरी उपन्यास बनचरी के विमोचन

मुम्बई का विले पार्ले स्थित “नवीन भाई ठक्कर सभागार” में “अभियान” संस्था का सहयोग से आयोजित ‘सबरंग फिल्म स्टार सम्मान समारोह’ आ ‘भोजपुरी पंचायत’ वार्षिकोत्सव का अवसर प डा0 अशोक…

भोजपुरी प्रतिनिधिमण्डल का तरफ से यूपी के राज्यपाल के सउँपाइल मांग पत्र

भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता दिआवे खातिर मांग करत एगो भोजपुरी प्रतिनिधि मंडल पिछला दिने यूपी के राज्यपाल राम नाईक जी से मिल के उनुका के आपन मांग पत्र सँउपलसि.…

समाचार? सब ठीक बा!

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ सीमा के पाती, बॉंची जा एह चिठ्ठी में चीख बा। दिल्लीवालन भूल ना जाईं समाचार सब ठीक बा।। धान-पान सब सूख गइल बा खेत-मजूरा चूक गइल…

आजकल रोज हम अखबार पढ़ेनीं

– ऋतुराज आजकल रोज हम अखबार पढ़ेनीं अखबार में आइल लेख दू-चार पढ़ेनीं। चोरी, हत्या, गरीबन के लूटल होखेला रोज कुछ बलात्कार पढ़ेनीं।। आजकल रोज हम अखबार पढ़ेनीं अखबार में…

दलित-विचार : बीचो के एगो राह होला

– देवेन्द्र आर्य दलित विचार का बारे में राजनीतिक सोच जतने व्यावहारिक, साफ आ मकसद वाला लउकेला, साहित्यिक सोच ओतने अझुराह, भकुआइल, ठहरल आ भेड़चाल वाला बा. अम्बेडकर से लगवले…

बिहार के बढ़न्ती के वादा

– ‍हरिराम पाण्डेय बिहार के चुनावी घमासान तेज होखल जात बा. एह चुनाव में जीते खातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगे एक से एक व्यूह बा. अबे हालही में ऊ…

लोकजीवन के “बढ़नी”

– डाॅ. अशोक द्विवेदी ‘लोक’ के बतिये निराली बा. आदर-निरादर, उपेक्षा-तिरस्कार के व्यक्त करे क टोन आ तरीका अलगा बा. हम काल्हु अपना एगो मित्र किहाँ गइल रहलीं. उहाँ दुइये…

पश्चिमी वैश्वीकरण बनाम भारतीय विश्व कुटुम्बवाद

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ पश्चिम के दू शब्द “वैश्वीकरण” आ “भूमंडलीकरण” बहुते लोकलुभावन आ मनभावन बा. एकरा बाहरी रुप,रंग आ सम्मोहक ढंग पर के नइखे रीझल. एकरा साम, दाम,…

बढ़ावन – 2 : भोजपुरी लोक के गृहस्थ-संस्कृति

– डाॅ. अशोक द्विवेदी गंगा, सरजू, सोन का पाट में फइलल खेतिहर-संस्कृति दरसल “परिवार” का नेइं पर बनल गृहस्थ संस्कृति हऽ. परिवार बना के रहे खातिर पुरुष स्त्री क गँठजोरा…