बाकिर काल्हु रात से फेर अँजोरिया वेबसाइट बंद हो गइल रहुवे. एह हॉस्ट से तंग आ गइल बानी बाकिर “उपर चढ़ि के देखा त घर घर एके लेखा”. हर वेबहास्ट का लगे कुछ ना कुछ समस्या बा. अबही हमरा हॉस्ट के कहना बा कि केहू अँजोरिया के खराब कइल भापूरा पढ़ीं…

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पूर्वांचलवासियन के आस्था के महापर्व छठ हर साल का तरह एहू साल भोजपुरी समाज दिल्ली के आइएनए कालोनी शाखा धूमधाम से आयोजित कइलसि. अतवार का दिने नहाय खाय से शुरू होके बुध का भोर में उगते सूरज के अरघ दिहला का साथे छठ व्रत के विधि पूरा भइल. एक तरफपूरा पढ़ीं…

अँजोरिया एक जगहा नीचे खसकल कुछ दिन पहिले कहले रहीं कि हम नं॰ वन का दौड़ में शामिल नइखीं काहे कि हमरा खातिर ऊ असंभव बा. जबे कुछ विजिट बढ़ेला तबे हमार वेब हॉस्ट मेहरबानी कर देलें आ दू तीन दिन खातिर सब कुछ गड़बड़ हो जाला. जइसे कवनो गाड़ीपूरा पढ़ीं…

– ममता सिंह एंटीबायोटिक ओह रसायन भा दवाई के कहल जाला जवना के इस्तेमाल चिकित्सा में बैक्टीरिया भा दोसर रोग पैदा करेवाल जीवाणु के खतम करे भा ओकर बढ़त रोके खातिर कइल जाला. डाक्टर लोग एंटीबायोटिक लेबे के सलाह तब देला जब हमनी का बैक्टीरिया से संक्रमित हो जानी भापूरा पढ़ीं…

– पाण्डेय हरिराम आजु दीपावली ह, अन्हार के दूर भगावे के तेहवार. एह तेहवार के भारतीय लोकजीवन में बहुते आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक महत्व ह. दीपावली के रात में दिया जला के हमनी का अन्हरिया पर उजियार के जीत के जश्न मनाइले. अन्हरिया असत्य, अन्याय भा नकारात्मक पक्ष के सूचकपूरा पढ़ीं…

एक कहावत ह चमत्कार के नमस्कार! इहो कहल जाला कि चमत्कार रोज-रोज ना होले. अइसने एगो चमत्कार भइल रहे साल 2004 में जब ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ बनल. ओह समय भोजपुरी में फिलिम बनत रहली सँ बाकिर ओतना ना जतना आजु बनत बा. एगो नाम रहल मनोज तिवारी ‘मृदुल’के जिनकर लोकपूरा पढ़ीं…

– अमितेश कुमार उमिर का मार से झूराइल ओह देहि में आजुवो उहे लोच बा. आंखि में चमक बढ़ि जाला जसही केहु नाच के नाम ले लेवेला. ऊ शान से रउआ के बतइहें कि मुजफ़्फ़रपुर के बाई जी के कइसे एक बेर ऊ हार मनवा दिहले रहले. लोग बाई जीपूरा पढ़ीं…

समय बदलत बा आ समय का साथे नया नया चीज, नया नया प्रणाली आ नया नया साधन निकलत जात बा. बहुते पाठक लोग के शिकायत रहल कि अँजोरिया उनुका मोबाइल भा स्मार्टफोन पर ठीक से नइखे देखल जात. एह चलते अँजोरिया के स्टाइल बदले के पड़ल बा. अब अँजोरिया केपूरा पढ़ीं…

कहानी. एगो अइसन आदमी के जेकर महतारी बे बियाहल रहे. जेकरा के गोद देबे के रहे से एन मौका पर मुकर गइल काहे कि ओकरा लड़की चाहत रहे आ पैदा लड़िका भइल. बेबिहाअल महतारी के जिद्द रहे कि ओकरे के गोद दिहल जाई जे पढ़ल लिखल होखी बाकिर जे आखिरकारपूरा पढ़ीं…

विजया दशमी पर्व असत्य पर सत्य के, अपराध पर न्याय के विजय पर्व हऽ. एकरा के हमनी का बहुविधि मनाइले सँ. रामलीला का मैदान में लागल रावण के बड़हन बड़हन पुतला फूंकल जाला बाकिर हर साल रावण ओहू ले बड़ रूप में फेरु से आ जाला. खाली पुतले बनि केपूरा पढ़ीं…

– पाण्डेय हरिराम आजुकाल्हु पश्चिमी देशन, खास कर अमेरिका में एगो बहस चलत बा कि का फांसी के सजा जायज ह ? अमरीका में 1970 से पहिले फांसी के सजा पर पाबंदी रहे बाकिर 1970 में सुप्रीम कोर्ट ओकरा के लागू कर दिहलसि आ अब फेरु एहपर सवाल उठावल जातपूरा पढ़ीं…