– ओ. पी. सिंह दुअरा सवतिया के पिया के बरतिया, देखि देखि फाटे रामा पथरो के छतिया. जिनिगी के जरेला सिंगार, दइबा दगा कइलें. एह घरी स्मार्टफोन के जमाना बा आ लोग सबेरे के गुड मार्निंग से ले के देर रात के गुड नाइट कइला का बीच में व्हाट्सअप पपूरा पढ़ीं…

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– ओ. पी. सिंह एने फेरू कुछ दिन से कुकुर चरचा में बाड़ें स. एह चलते कुछ लोग कुकुरहट प उतरआइल बा त बाकी लोग ओकनी से कुकुरबझाँव करे में अझूराइल बाड़ें. हालांकि कुकुरन का बारे में हमार अनुभव कुछ दोसरे बा. कुकुरन के कबो नेता बने के मौका नइखेपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह एगो पुरान गीत के मुखड़ा आजु याद आ गइल. इयरवा से लागल बाटे इयरिया घरवा का चोरिया-चोरिया ना. अब चुनाव का माहौल में इयार के इयारी के चरचा से ई मत बूझीं सभे कि हम वेलेंटाइन डे के कवनो चरचा करे जात बानी. हमनी किहाँ तपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह भारत में मोदी आ अमेरिका में ट्रम्प. दूनू जने के राशि एके होखे के चाहीं. काहें कि दूनू के जीत के कहानी करीब-करीब एके जइसन बा. जब मोदी अपना गोल के नेता बने के इरादा जतवलन त पहिले से जमल नेता पूरा कोशिश क देखवलें किपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछलका हफ्ता बहुते कुछ देखे सुने के मिलल. ओही में से कुछ बातन के चरचा. खादी विभाग के कलेण्डर प चरखा चलावत मोदी के देख उनुका विरोधियन के करेजा फाट गइल. चारो तरफ चरखी नाच गइल आ मोदी के विरोधियन के करेजा फाट गइल. ओह लोगपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह आपन देश गजबे ह. एहिजा तरह तरह के अजूबा देखे के मिलि जाला. सबले बरियार नेता के तानाशाह बतावत तरह तरह के विशेषणन से नवाज दीहल जाला आ नवाजे वाला निश्चिन्त रहेला कि ओकरा खिलाफ कवनो कार्रवाई नइखे होखे वाला. जे खुद जेल भेजे लायक होलापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता लिखले रहीं कि नाम में का धइल बा आ एह हफ्ता फेरु नामे के चरचा ले के बइठ गइनी. बाकि करीं त का ? कुछ दिन पहिले ले नोटबन्दी के चरचा रहुवे. कहीं से शुरू करीं बात घुमा फिरा के नोटबन्दी प आ जातपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह नाम में का धइल बा. नाम कुछऊओ होखे, काम बढ़िया रहल त नाम होईये जाई आ काम खराब हो गइल त सगरी बनलो नाम खराब हो जाए से बचावल ना जा सकी. अलग बाति बा कि कई बेर कुछ लोग के लागेला नेकनेम ना त बदनामेपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह महफिल अपना शबाब पर रहुवे. नाच मण्डली के मलकिनी साज वालन का पीछे बइठल नचनियन के जोश बढ़ावत रहली. मसनद के सहारा लिहले बाबू साहब नाच के आनन्द लेत रहलन. नाचत लउण्डा गाना उठावे आ कुछ कुछ देर पर बाबू साहब के धेयान खींचे के कोशिशपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह अब बतंगड़ ले के आगा बढ़ीं ओह से पहिले जरुरी लागत बा कि कुछ बतकुच्चन करत चलीं। काहे कि हो सकेला कुछ लोग कुमरपत आ सोर के सही मतलब ना समुझ पावे। आ जब सोरे झुरा जाई त पतई कइसे निकली ? सोर आ शोर जइसनपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह नोटबन्दी के मार से आम जनता के भइल परेशानियन से कुछ नेता बहुते परेशान बाड़ें. उनकर कहना बा कि जौ का साथे घुनो पिसाता आ सरकार के चाहत रहुवे कि घुन के बचावे के इन्तजाम पहिले कर लीत. आ हमरा लागत बा कि घुन का फिकिरेपूरा पढ़ीं…