आरा के वीर कुंवर सिंह विश्विवद्यालय के भोजपुरी विभाग पिछला दिने “भोजपुरी भाषा के दशा आ दिशा” पर एगो सेमिनार आयिजित कइलस जवना के उद्घाटन पूर्व सभापति प्रो॰ अरुण कुमार कइले आ कुलपति डा॰ सुभाष प्रसाद सिन्हा आ भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा॰ रविकान्त दुबे संयुक्त रुप से कइले. सेमिनार में मारीशस के भोजपुरी विद्वान आ अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान के महासचिव डा॰ सरिता बुद्धू मुख्य अतिथि रहली.

प्रो॰ अरुण कुमार के कहना रहे कि भोजपुरी में बहुते अइसन शब्द बाड़ी सँ जवना के दोसरा भाषा में शामिल कइल गइल बा. भोजपुरी के विकास खातिर ऊ साहित्यकारन के साथ साथ सभका के आगे आवे के कहले. डा॰ सरिता बुद्धू कहली कि भोजपुरी पिछला पौने दू सौ साल से सुरक्षित बिया आ एकरा से फ्रेंच आ क्रेओल समेत कई भाषा शब्द उधार ले के आपन बना लिहले बाड़ी स. कहली कि भोजपुरी व्याकरण के प्रचार प्रसार के जरुरत बा. डा॰ सुभाष प्रसाद सिन्हा बतवले कि आरा विश्वविद्यालय के मारीशस का साथे टाईअप होखे वाला बा जवना से विश्वविद्यालय के पहचान बढ़ी. अकादमी के प्रशंसा करत कुलपति के कहना रहे कि एह तरह के कार्यक्रम पटना से बाहर निकल के भोजपुरी भाषी शहरन में करावे के काम प्रशंसा जोग बा. कहले कि विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग के सरकार से मान्यता दिआवे के कोशिश हो रहल बा.

सेमिनार में आइल जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिहं कहले कि भोजपुरी भाषा में बहुते ताकत बा. भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा॰ रविकान्त दूबे के कहना रहे कि अकादमी भोजपुरी के विकास का दिशाईं तेजी से लागल बिया. कहले कि एह साल का आखिर में पटना में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कइल जाई.

एह मौका पर डा॰ सरिता बुद्धू के लिखल भोजपुरी व्याकरण के दू गो किताब के विमोचन कइल गइल.

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2 Comments

  1. Sir.maine bhojpuri loksahitya vastu ewam ruptatwik visleshan topic par p.HD kiya hai.

  2. सबसे पाहिले हम डा॰ सरिता बुद्धू जी के प्रणाम करत बानी !आ उनुकर स्वागत करत बानी कि मारीशस से आके भोजपुरी के प्रचार -प्रसार कर रहल बाड़ी .लगत बा भोजपुरी आपन प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहल बा .जगह – जगह सेमिनार के आयोजन कइल जा रहल बा . डा॰ सरिता बुद्धू जी आपन भोजपुरी व्याकरण के दू -दू गो किताब हमनी खातिर लिख दिहलीं .एक बात हम कहल चाहत बानी कि भोजपुरी से संबंधित सेमिनार-सभा में आम आदमी के भी जोरदार भागीदारी होखे के चाहीं .
    धन्यवाद !
    ओ.पी . अमृतांशु

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