अपना देशे ना विदेशो के कई-एक देशन में बोलल जाए वाली भाषा के सबले बड़का समस्या हमरा विचार से हवे एकरा लिखनिहारन में हिन्दी के भोजपुरियावे के बेमारी. बचपन से लगवले स्नातकोत्तर ले हिन्दी में पढ़ल-लिखल लोग ठेंठ भोजपुरी के कगरिया देबेला. आ भोजपुरी के विद्वान मनई कबो एह पर काम ना कइलें कि भोजपुरी के लिखल आ पढ़लो के वइसने सहज बना दीहल जाव जइसन सहज ई बोले में बावे.

बीस बरीस से अधिका से भोजपुरी के ई पहिलका वेबसाइट अँजोरिया चलावत आ अँजोर करत हमार अनुभव बहुते खराब रहल बा. कहे खातिर त भोजपुरी के कवनो संस्था विश्व आ अखिल ब्रह्माण्ड से कम के ना होखे. बाकिर करीब करीब सगरी संस्थन के अधिकतर कामकाज हिन्दी में, आ कुछ महान संगठनन के कामकाज त अंगरेजी तकले में होखेला.

शायदे कवनो अइसन भोजपरी संस्था भा संगठन होखी जवन मानत त दूर, जानतो होखे कि भोजपुरी के एगो वेबसाइट बीस बरीस से अधिका से भोजपुरी के अँजोर करे में लागल होखे. एह महान संगठनन के प्रेस विज्ञप्ति अँजोरियो का लगे हिन्दी में आवेला. कई बेर एह लोग से निहोरा कर चुकनी कि आपन विज्ञप्ति भोजपुरी में लिखे के आदत डालीं, आ ओकरा साथे ओकर अनुवाद – उल्था कहब त कुछ लोग के बुझइबे ना करी – हिन्दी, अंगरेजी भा कवनो भाषा में नत्थी कर दीं. काहें कि भोजपुरी के एगो अइसन प्रकाशन नइखे जवन रोज भा साप्ताहिक अँजोर होखत होखे आ विज्ञप्तियन के टटका प्रकाशन ना होखो त ओकर महत्व कम हो जाई.

दोसरा से भीख माँगे में सहज आ अपना के ओह जोग बनावे से परहेज कइला के अइसन उदाहरण अउरी कतहीं ना मिली. सविधान के आठवीं अनुसूची में भोजपुरी के शामिल करावे के मांग त आएदिन होखल करेला. अगिला लोकसभा चुनाव कपारे आ गइल बा त एकर हल्ला अउर बढ़ेवाला बा आए वाला दिनन में. बाकिर अइसन केहू नइखे जे भोजपुरी के प्रकाशन बड़का पैमाना पर करे के योजना बनावे. कुछ बरीस पहिले महुआ टीवी से बहुते उमेद जागल रहुवे. ओकर देखा-देखी कई गो अउरिओ चैनल शुरु भइली सँ भोजपुरी में बाकिर सभकन के जम्हुआ छू दिहलसि. ठीक वइसहीं जइसे अँजोरिया के बाद बहुते नया-नया वेबसाइट अइली सँ. भोजपुरिया डॉटकॉम के लमहर दिन ले ना जी पावे के दुख जतना हमरा के हमेशा बेधत रहेला शायद ओतना ओकरा के प्रकाशित करे वालन के शायद नाहिए होखी.

साधन आ तकनीकि क्षमता में भोजपुरिया डॉटकॉम के कवनो सानी ना रहल. हम त बिना तकनीकि जानकारी, बिना साधन-संसाधन अँजोरिया के आजु ले जिअवले रखले बानी त एही चलते कि हमरा कबो कवनो जरुरत ना रहल दरबार करे के. तूं हमरा ओरी देखऽ, हम तोहरा ओरी देखे के नेवता-हकारिओ हमरा से ना हो पावल. बस एगो पागलपन कह लीं भा अपना माई-भाषा से छोह कि सगरी दिक्कत का बादो एकरा के जिअवले रखनी. अब जब मजबूरी हो गइल त भोजपुरियन का सोझा हाथ पसरलीं कि – एक अकेला थक जाएगा साथी हाथ बढ़ाना – तबो अंगुरिए पर गिन लेबे जोग भामाशाह सामने अइलें. तबो संतोष बा कि कुछ लोग त आगे बढ़ल. हो सकेला कि कुछ लोग अउरिओ आगे आवे.

बाकिर ओहू ले अधिका जरुरत बा भोजपुरी के एगो मानक बनवला के. भोजपुरी के विद्वानन आ संस्थन के एह दिसाईं काम कइला के. ना त भोजपुरी के गीत-गवनई, कैसेट, सिनेमा त चल जाई बाकिर किताब आ प्रकाशनो चल जाव एकरा खातिर भोजपुरी के मानक बनावे के बहुते जरुरत बा. भोजपुरी में ने आ भी के विकल्प तयो कइला के जरुरत बा. हमरा विचार से ने आ भी भोजपुरी के सुभाव बिगाड़ देला. ने आ भी हटवला का चलते कई बेर नामो के बिगाड़े के पड़ेला. राहुल गाँधी कहलन आ राहुल गाँधी ने कहा, राहुलो गाँधी के इहे राय बा आ राहुल गाँधी की भी यही राय है के फरक सबका समझ में आ जाई. बाकिर हिन्दी वाला सुभाव असहज हो जाला संज्ञा के बिगड़ल रूप देखि के जबकि संस्कृत में ई काम जमाना से होखत आइल बा जब हिन्दी के जनमो ना भइल रहुवे.

अइसनका बहुते उदाहरण विद्वान लोग जानत होखी. जरुरत बा एकरा पर गहन चर्चा कइला के. हो सके त एकाध गो यू-ट्यूब चैनल भोजपुरी में शुरु कइला के. रविश पाण्डेय आ मनोज भावुक एह दिसाईं आगा डेग बढ़वले बाड़न बाकिर ई काम ओतना समर्पित भाव से नइखे होखत जवना से विपरीत राजनीति आ सोच वाला लोग सहज भाव से जुड़ पावे. एह दिसाईं अउर काम कइला के जरुरत बावे.

लुत्ती बारे के कोशिश त हम कइले बानी बाकिर लहोक उठावे के काम रउरा करे के पड़ीं. सोचीं आ विचार कर के एह समर में कूद पड़ीं.

हँ, आ आखिर में कि आर्थिक सहजोग कइल नइखी चाहत त कवनो बात नइखे बाकिर हँकारी पारे के, हमरा लिखला पर कुछ टीपन करे में कवन आ काहें कंजूसी. हम ना त राउर नाम जानल चाहत बानी, ना ईमेल, ना फोन नंबर. बाकिर अपना टीपला का साथे आपन नामो लिख देब त बाउर ना कहाई. रउरा नाम के पता ना कतना हजार लोग होखी. सभका खुशी होखी कि उनुका के जानेवाला लोग इहे सोची कि उनकरे लिखल हवे.

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कुछ त कहीं......

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