rahulजयपुर में भइल कांग्रेस के चिन्तन शिविर में कांग्रेसी नवहियन के चिन्ता के स्वर देत पार्टी में पहिलही से नंबर टू के हैसियत राखे वाला राहुल गाँधी के उपाध्यक्ष बनावे के घोषणा कर दिहल गइल. एहसे ई बात साफ हो गइल कि चिन्तन शिविर त बस बहाना रहल राहुल के राजतिलक के. मौजूदा प्रधानमंत्री का मौजूदगी में राहुल के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बतावे के आवाज अतना तेज बा कि ओह में मनमोहन सिंह के आत्मसम्मान दबा जाए के चाहीं. ना त ऊ अपने से त्यागपत्र दे के राहुल खातिर राह खोल देतन.

कांग्रेस का इतिहास में पहिला बेर भइल बा कि पार्टी के अध्यक्ष आ उपाध्यक्ष महतारी बेटा बन गइल बाड़ें. अब बस कमी अतने रहि गइल बा कि राहुल के प्रोमोशन से खाली भइल महा महासचिव के पद प्रियंका गाँधी के दे दिहल जाव. कांग्रेस में तिसरका बेर केहू के उपाध्यक्ष बनावल बा. पहिला बेर राजीव गाँधी का समय में अर्जून सिंह के बनावल गइल रहे आ दोसरका बेर सीताराम केसरी का समय में जितेन्द्र प्रसाद के.

हालांकि ई पता नइखे चलत कि राहुल के वीपी बना के कवन तीर मार लिहल गइल. राहुल त पहिलहीं से पार्टी में बड़हन हैसियत वाला रहलन आ सोनिया गाँधी छोड़ सभही उनुका से नीचे रहल. अगर साँच कहल जाव त वीपी बना के राहुल के औकात पर ले आवे के कोशिश भइल बा. काहे कि अब ऊ अपना हार के जिम्मा पार्टी पर ना दे सकसु. बिहार, यूपी आ पंजाब के चुनाव कांग्रेस राहुल का देखरेख में लड़ चुकल बिया आ तीनो जगहा मिलल हार के जिम्मा दोसरा कपारे डाल दिहल गइल. पार्टी के अध्यक्ष आ उपाध्यक्ष दुनु पद जब एकही परिवार का नामे बा त दोसरा पर कवनो जिम्मा फेंकल आसान ना होखी.

एही साल देश में पाँच गो राज्य विधानसभा के चुनाव होखे वाला बा आ राहुल के अब आपन पूरा ताकत लगा देबे के पड़ी कांग्रेस के फायदा चहुँपावे खातिर. का ई संभव हो पाई. कांग्रेस बस अतने पर संतोष कर सकेले कि भाजपा के अपने कलह से फुरसत नइखे. भाजपा के नेता के रही एकर फैसला करे में देरी होखत बा. भाजपाईअन के कहना बा कि सही समय पर सही फैसला ले लिहल जाई. शायद ओकरा डर बा कि फैसला लेते कुछ ओइसन दल राजग से बाहर निकल सकेलें जे गुड़ त खालें बाकिर गुलगुला से परहेज राखेलें. कांग्रेस भाजपा के एही दुविधा का भरोसे जियत बिया. ओकरा लागत बा कि भाजपा अगर नरेन्द्र मोदी के आपन नेता बनवलसि त राजग छितरा जाई आ मुस्लिम वोट ओकरा पसँगे आ जाई. आ अगर जे कहीं राजग का चलते मोदी का जगहा दोसरा के नेता बनावल गइल त राहुल ओकरा पर बीसे ना इकइस पड़ीहें.

वइसे कांग्रेस के एह फैसला से चिन्तन शिविर के महत्व खतम हो गइल. सोनिया गाँधी के भाषण से लागल रहे कि ऊ चाहत बाड़ी कि पार्टी एह पर चिन्ता करो कि का बात बा कि देश के जनामानस कांग्रेस से बिदकत जात बा आ ओकरा परंपरागत वोट बैंक में दोसर पार्टी सेंध मारे लागल बाड़ी सँ. बाकि ऊ हो ना सकल आ देश का सोझा साफ हो गइल कि कांग्रेस देश खातिर चिन्तित नइखे, परिवार खातिर जरूर बिया.

एहिजा इहो बतावल जरूरी बा कि देश के बहुते लोग के ई गलतफहमी बा कि सोनिया का तरह विदेशी मूल के मुद्दा राहुल के परेशान ना करी. जबकि वास्तविकता ई बा कि राहुल गाँधी अबहियों इटली के नागरिकता लिहले बाड़न, छोड़ले नइखन. अब एह दोहरी नागरिकता का चलते प्रणव मुखर्जी उनुका के सरकार बनावे ला बोलइहें कि ना इहो देखे के पड़ी.

By Editor

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